पीटरमैरिट्ज़बर्ग: दक्षिण अफ्रीका के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और रंगभेद विरोधी आंदोलन के महानायक इंकोसी अल्बर्ट जॉन लुथुलि की मौत को लेकर दशकों पुराना रहस्य अब खुलने लगा है। लगभग 58 साल बाद, दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि लुथुलि की मृत्यु एक दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हत्या थी। दक्षिण अफ्रीका की एक शीर्ष अदालत ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता अल्बर्ट लुथुली की दक्षिण अफ्रीकी रेलवे कंपनी के कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रही रंगभेदी पुलिस ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
पीटरमैरिट्ज़बर्ग हाईकोर्ट ने 1967 की उस जांच को भी रद्द कर दिया है जिसमें पाया गया था कि लुथुली की मौत एक मालगाड़ी की चपेट में आने से हुई थी। फैसला सुनाते हुए, न्यायाधीश नोम्पुमेलो राडेबे ने कहा कि दोबारा खोली गई जाँच में पेश किए गए सबूत 1967 की जाँच के निष्कर्षों का समर्थन नहीं करते। गौरतलब है कि अल्बर्ट लुथुलि की मौत 21 जुलाई 1967 को एक ट्रेन की चपेट में आने से हुई बताई गई थी। उस समय देश रंगभेद शासन के अधीन था और सरकारी एजेंसियों ने इस घटना को "दुर्भाग्यपूर्ण रेल दुर्घटना" बताया था। यह फैसला दक्षिण अफ्रीका के क्वाज़ुलु-नटाल हाई कोर्ट ने सुनाया।
अदालत ने कई महीनों तक चली नई जांच के बाद पाया कि उस दौर में रंगभेद विरोधी नेताओं को अक्सर उत्पीड़न, निगरानी और हिंसा का सामना करना पड़ता था, और इस महान नेता की मौत भी उसी राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा थी। अदालत ने कहा, "यह असंभव है कि इतने अनुभवी व्यक्ति का ट्रेन से दुर्घटनावश टकराव हुआ हो। उपलब्ध सबूत बताते हैं कि उनकी हत्या की गई थी, और इसे दुर्घटना की तरह पेश किया गया।" अल्बर्ट लुथुलि ज़ुलू समुदाय के पारंपरिक नेता और अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (एएनसी) के अध्यक्ष थे। उन्होंने 1950 और 60 के दशक में अहिंसात्मक संघर्ष के ज़रिए रंगभेद शासन के खिलाफ आवाज़ उठाई।
महात्मा गांधीजी के सिद्धांतों से प्रेरित होकर उन्होंने हमेशा शांति, संवाद और नैतिक साहस को हथियार बनाया। उनके इसी योगदान के लिए उन्हें 1960 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था वे अफ्रीका के पहले नोबेल शांति विजेता बने। एएनसी और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह रंगभेद काल के अन्याय के खिलाफ "सत्य और न्याय की ऐतिहासिक जीत" है। दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने संकेत दिया है कि इस फैसले के बाद रंगभेद-युग के दौरान हुई अन्य मौतों की भी पुनः जांच की जा सकती है।



Mahanagar Media Network Pvt.Ltd.
Sudhir Dalvi: +91 99673 72787
Manohar Naik:+91 98922 40773
Neeta Gotad - : +91 91679 69275
Sandip Sabale - : +91 91678 87265
info@hamaramahanagar.net
© Hamara Mahanagar. All Rights Reserved. Design by AMD Groups
Sun, Nov 02 , 2025, 07:57 AM