Exhibition Event: “बिहार की बौद्धिक परंपरा ,पांडुलिपियाँ, चित्र एवं अभिलेख” विषय पर विशेष प्रदर्शनी का आयोजन!

Mon, Mar 16 , 2026, 07:44 PM

Source : Uni India

पटना। बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय, खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी एवं बिहार संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “बिहार की बौद्धिक परंपरा : पांडुलिपियाँ, चित्र एवं अभिलेख” विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण (under Gyanbharatam), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा देशभर में पांडुलिपियों के संरक्षण, संवर्धन एवं उनके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज बिहार की बौद्धिक परंपरा : पांडुलिपियाँ, चित्र एवं अभिलेख” विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए सांस्कृतिक कार्य निदेशालय के निदेशक कृष्ण कुमार (Krishna Kumar) ने कहा कि बिहार की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां न केवल हमारी ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखने में सहायक होती हैं, बल्कि आमजन, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अपने इतिहास और ज्ञान परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनती हैं। उन्होंने पांडुलिपियों के संरक्षण एवं अध्ययन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। इस अवसर पर अभिलेख निदेशक डॉ. मोहम्मद फैसल अब्दुल्लाह (Dr. Mohammad Faisal Abdullah) ने कहा कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित पांडुलिपियाँ, चित्र एवं अभिलेख बिहार की समृद्ध बौद्धिक परंपरा की झलक प्रस्तुत करते हैं। इससे आमजन, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को समझने का अवसर प्राप्त होगा।

 पटना संग्रहालय के अंतर्गत बिहार रिसर्च सोसायटी में प्राचीन पांडुलिपियों का एक अद्वितीय संग्रह सुरक्षित है, जिसमें विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी लगभग 10,000 से अधिक पांडुलिपियाँ संरक्षित हैं। इन पांडुलिपियों में प्रमुख रूप से महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा तिब्बत से लायी गई पांडुलिपियाँ शामिल हैं, जो बौद्ध दर्शन, धर्म, इतिहास, व्याकरण, कविता, चिकित्सा, ज्योतिष, यात्रा-वृत्तांत तथा अन्य विषयों से संबंधित हैं। इन पांडुलिपियों में कांग्यूर, तांग्यूर तथा मिश्रित श्रेणी की पांडुलिपियाँ भी सम्मिलित हैं, जिनकी लिपियाँ मुख्यतः सम्भोटा एवं तिब्बती हैं।

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