IDBI Bank Share Price: सोमवार, 16 मार्च को इंट्राडे ट्रेडिंग में IDBI Bank Limited के शेयर 15% गिर गए। इसकी वजह उन रिपोर्टों को माना जा रहा है जिनमें कहा गया है कि भारतीय सरकार (Indian government) की इस बैंक में अपनी ज़्यादातर हिस्सेदारी बेचने की कोशिशें शायद रद्द कर दी जाएंगी। IDBI Bank के शेयर की कीमत (IDBI Bank's share price) BSE पर 15.34% तक गिरकर ₹78.05 पर आ गई, जो इसके एक साल के निचले स्तर ₹72.04 के करीब है। ट्रेडिंग वॉल्यूम भी आम दिनों से ज़्यादा था।
IDBI Bank के शेयर की कीमत क्यों गिर रही है?
कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने PSU के शेयर (PSU's shares) बेचने की योजना रद्द कर दी है, क्योंकि मिली बोलियां न्यूनतम अपेक्षित कीमत से कम थीं, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। भारतीय सरकार और सरकारी स्वामित्व वाली Life Insurance Corporation of India (LIC) ने 2022 में इस बैंक की 60.7% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी।
Bloomberg की एक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा बिक्री प्रक्रिया रद्द कर दी जाएगी क्योंकि मिली बोलियां बिक्री के लिए तय की गई 'रिज़र्व प्राइस' (यानी न्यूनतम बिक्री मूल्य) से कम थीं। Mint इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। पहले की रिपोर्टों में बताया गया था कि IDBI Bank की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में कनाडाई निवेश समूह Fairfax Financial और Emirates NBD ने बोलियां लगाई थीं। मौजूदा वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) तक, IDBI Bank में सरकार और LIC की हिस्सेदारी क्रमशः 45.48% और 49.24% थी, जिससे प्रमोटरों की कुल हिस्सेदारी 94.71% हो गई थी।
IDBI Bank की कमाई
इस सरकारी बैंक ने हाल के वर्षों में फिर से मुनाफ़ा कमाना शुरू कर दिया है। Q3 FY26 के लिए, मुनाफ़ा बढ़कर ₹1935 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹1908 करोड़ था। वहीं, दिसंबर तिमाही में शुद्ध ब्याज आय साल-दर-साल (YoY) 24% गिरकर ₹3209.5 करोड़ रह गई, जबकि एक साल पहले यह ₹4,228.2 करोड़ थी। एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है; FY26 की तीसरी तिमाही में ग्रॉस NPA अनुपात 2.57% रहा, जबकि एक साल पहले यह 3.57% था - यानी इसमें 100 bps की गिरावट आई है। नेट NPA अनुपात 0.18% पर बना रहा।
IDBI Bank: शेयर की कीमत का आउटलुक
टेक्निकल एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि PSU बैंक स्टॉक IDBI Bank में और गिरावट आ सकती है। Lakshmishree Investment के रिसर्च हेड, अंशुल जैन ने कहा कि हाल ही में आई तेज़ गिरावट ने ब्रेकआउट बायर्स को फंसा दिया है, जिससे एक क्लासिक 'लॉन्ग ट्रैप' बन गया है और मार्केट का मोमेंटम पूरी तरह से 'बेयर्स' (गिरावट चाहने वालों) के पक्ष में चला गया है। उन्होंने कहा, "ऊंचे टाइमफ्रेम पर कीमत का स्ट्रक्चर कमज़ोर हो गया है, और रिकवरी की हर कोशिश पर सप्लाई हावी हो रही है। इस गिरावट (ब्रेकडाउन) ने अब 75 के आस-पास मौजूद 50-महीने के मूविंग एवरेज की ओर रास्ता खोल दिया है, जो अब नज़र रखने के लिए पहला बड़ा सपोर्ट लेवल बन गया है।"
जैन ने कहा कि अगर बिकवाली का दबाव बना रहता है और यह लेवल टिक नहीं पाता, तो अगली संभावित गिरावट 64.51 के आस-पास मौजूद पिछले मासिक 'स्विंग लो' (swing low) तक जा सकती है। उन्होंने सलाह दी कि जब तक स्टॉक मज़बूत खरीदारी के साथ ब्रेकआउट ज़ोन को दोबारा हासिल नहीं कर लेता, तब तक शेयर में आने वाली तेज़ी (रैली) सिर्फ़ एक सुधार (corrective) ही मानी जाएगी, और मार्केट का झुकाव गिरावट की ओर ही बना रहेगा।



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