Fadnavis makes a bold claim: अगर महाराष्ट्र अलग देश होता तो दुनिया की 30वीं सबसे बड़ी इकॉनमी होती; फडणवीस का बड़ा दावा!

Thu, Mar 12 , 2026, 08:21 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने बुधवार को दावा किया कि राज्य की अर्थव्यवस्था इतनी सशक्त है कि यदि यह एक स्वतंत्र देश होता, तो दुनिया की 30वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होता। विधानसभा में बजट चर्चा का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक प्रगति का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मामले में महाराष्ट्र ने ऑस्ट्रिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। 

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार हो रहा है। विपक्ष की आलोचनाओं को खारिज करते हुए उन्होंने जीडीपी ग्रोथ, कर्ज प्रबंधन और अन्य आर्थिक संकेतकों के ठोस आंकड़े सदन के पटल पर रखे। मुख्यमंत्री के अनुसार, महाराष्ट्र की जीडीपी पिछले एक दशक में 16 लाख करोड़ रुपये (2013-14) से बढ़कर 51 लाख करोड़ रुपये हो गयी है। राज्य ने 10.4 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। भारत की कुल जीडीपी में अकेले महाराष्ट्र का योगदान 14.7 प्रतिशत है और 3.47 लाख रुपये की प्रति व्यक्ति आय के साथ राज्य देश में पांचवें स्थान पर है।

उन्होंने आगे कहा कि निर्यात, स्टार्टअप और वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महाराष्ट्र देश का नेतृत्व कर रहा है। राज्य निर्यात में पहले स्थान पर है और यहां देश के सबसे अधिक स्टार्टअप कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने इन उपलब्धियों का श्रेय राज्य के मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे को दिया। ऋण की स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में महाराष्ट्र का ऋण-जीडीपी अनुपात 18.8 प्रतिशत है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि यह मध्य प्रदेश (30%), हिमाचल प्रदेश (38%), बिहार (35%) और पश्चिम बंगाल (38%) जैसे राज्यों से बहुत बेहतर स्थिति में है।

उन्होंने जोर दिया कि 25 प्रतिशत से कम ऋण अनुपात वाले राज्य आर्थिक रूप से 'स्वस्थ' माने जाते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2014 के मुकाबले केंद्र से मिलने वाली धनराशि 14,000 करोड़ रुपये से पांच गुना बढ़कर अब 87,000 करोड़ रुपये हो गयी है। वित्तीय अनुशासन पर उन्होंने कहा कि सरकार राजकोषीय घाटे को तीन प्रतिशत और राजस्व घाटे को एक प्रतिशत से नीचे रखने में सफल रही है। राजस्व प्राप्तियां अब 6.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गयी हैं। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि महामारी के दौरान लिया गया अतिरिक्त ऋण केवल विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे के निर्माण में लगाया गया था। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पूंजीगत व्यय 25,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राजस्व-ऋण अनुपात 18 प्रतिशत होना राज्य की वित्तीय स्थिरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

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