WTO agricultural negotiations: डब्ल्यूटीओ के कृषि वार्ता के संशोधित मसौदे का पश्चिम अफ्रीकी कपास उत्पादक देशों ने किया विरोध!

Mon, Mar 09 , 2026, 08:47 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

नयी दिल्ली: विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटी) की चौदहवीं मंत्रिस्तरीय बैठक के लिए कृषि-व्यापार के संबंध में वार्ता समिति के अध्यक्ष की ओर रखे गये संशोधित प्रस्ताव का कपास पर निर्भर चार अफ्रीकी कपास उत्पादक देशों के समूह सी-4 ने विरोध किया। डब्ल्यूटीओ की सार्वजनिक वेब साइट पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सी-4 में शामिल पश्चिम अफ्रीका के चार देशों, माली, चाड, बेनिन और बुर्किना फासो समेत कुछ सदस्य देशों ने कहा है कि वार्ता के इस इस चरण में कृषि व्यापार संबंधी मसौदे का समर्थन नहीं कर सकते, क्योंकि इसमें कपास का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा है कि इस मसौदे से उनकी चिंताओं का पर्याप्त समाधान नहीं होता।

डब्ल्यूटीओ में कृषि वार्ता समिति के अध्यक्ष और जिनेवा में पाकिस्तान के राजदूत अली सर्फराज हुसैन ने आगामी मंत्रिस्तरीय बैठक यह मसौदा प्रस्तुत किया है। यह बैठक 26 से 29 मार्च तक मैमरून की राजधानी यउंदे में आयोजित की जा रही है। डब्ल्यूटीओ की वेबसाइट पर प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि छह मार्च को हुई कृषि वार्ता समिति की बैठक में अधिकतर सदस्य देशों ने अध्यक्ष की ओर से प्रस्तुत मसौदे का स्वागत किया और इसे सहमति बनाने के लिए एक आधार माना, हालांकि कुछ सदस्य देशों ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में यह उन्हें स्वीकार्य नहीं है। 

हुसैन ने संशोधित मसौदे के बारे में कहा, "मेरे विचार में यह पाठ संतुलन बनाने का प्रयास करता है और सदस्यों की उस साझा महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जिसके तहत वे एक न्यायसंगत और बाजार-उन्मुख कृषि व्यापार प्रणाली की दिशा में काम करना चाहते हैं, जो खाद्य सुरक्षा में सुधार सहित ठोस परिणाम दे सके।” उन्होंने कहा कि इस मसौदे के आधार पर मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद जिनेवा लौटने पर वार्ताओं को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की बेहतर स्थिति में रखेगा।

कई सदस्यों ने कहा कि भले ही यह उनके सभी दृष्टिकोणों को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता, फिर भी यह विभिन्न प्रतिस्पर्धी हितों के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाता है और मंत्रीस्तरीय सम्मेलन में सहमति बनाने के लिए एक अच्छा आधार प्रदान करता है। कुछ देशों ने कहा कि वे चाहते थे कि उनकी विशिष्ट वार्ता प्राथमिकताएं मसौदे में शामिल हों, लेकिन समझौते की भावना से वे अध्यक्ष द्वारा तैयार किए गए प्रारूप को स्वीकार कर सकते हैं। कुछ सदस्यों ने यह भी सुझाव दिया कि पाठ में आगे संशोधन किया जाना चाहिए।

इस मसौदे को कृषि आयातक और निर्यातक दोनों प्रकार के देशों, विकसित और विकासशील देशों का समर्थन मिला। कई वार्ता गठबंधनों ने संयुक्त बयान देकर संशोधित मसौदे का स्वागत किया। एक सदस्य ने चेतावनी दी कि उनके विचार में यह पाठ सदस्यों को नयी वार्ता पद्धतियों की खोज करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रतिबद्ध नहीं करता, जो वर्तमान वार्ता गतिरोध को तोड़ने में मदद कर सकती हैं। सी-4 के देशों के अलावा प्रस्ताव का विरोध करने वाले किसी अन्य देश का नाम नहीं दिया गया है। इस मसौदे पर 14वीं मंत्रिस्तरीय बैठक में सहमति बनाने की कोशिश हो सकती है।

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