नयी दिल्ली। भारतीय नौसेना (Indian Navy) का प्रशिक्षण पोत आईएनएस तरंगिनी (INS Tarangini) एक प्रशिक्षण यात्रा के हिस्से के रूप में श्रीलंका के त्रिंकोमाली बंदरगाह पहुँच गया है। नौसेना प्रवक्ता ने रविवार को जारी एक बयान में बताया कि यात्रा के दौरान तरंगिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने पूर्वी नौसेना क्षेत्र के उप कमांडर कोमोडोर हरिता जयदेवत (Haritha Jayadevath) से मुलाकात की और पाल प्रशिक्षण (सेल ट्रेनिंग) में सहयोग पर चर्चा की। जहाज ने श्रीलंकाई सैनिकों, उनके परिवारों और प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए जहाज पर एक परिचय दौरे की मेजबानी की। जहाज के इस बंदरगाह प्रवास के दौरान सामुदायिक जुड़ाव गतिविधियों और प्रशिक्षण आदान-प्रदान की योजना बनायी गयी है। श्रीलंका नौसेना और समुद्री अकादमी के चयनित प्रशिक्षु अधिकारी कोलंबो तक की यात्रा के लिए आईएनएस तरंगिनी पर सवार होंगे। इस यात्रा के दौरान, प्रशिक्षुओं को पाल प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
आईएनएस तरंगिनी की संकल्पना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध डिजाइनर कॉलिन मुडी ने की थी और इसका निर्माण स्वदेशी रूप से गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में किया गया था। इस पोत में एक मजबूत स्टील हल है और एल्युमीनियम डेकहाउस है और सागौन (टीक) की लकड़ी की बारीक नक्काशी से इसके आंतरिक भाग को सजाया गया है।
लगभग 54 मीटर की कुल लंबाई और करीब 500 टन की विस्थापन क्षमता वाले इस जहाज में 10,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में फैले 20 पाल (सेल्स) लगे हैं। इसकी रिगिंग में लगभग 200 रस्सियों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें एक सिरे से दूसरे सिरे तक बिछाने पर उनकी लंबाई 20 किलोमीटर से अधिक हो जाती है। तीन मस्तूलों वाला यह बार्क (थ्री-मास्टेड बार्क), भारतीय नौसेना का पहला समर्पित पाल प्रशिक्षण पोत (एसटीएस) है। यह कोच्चि स्थित प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के तहत संचालित होता है और मुख्य रूप से भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारी प्रशिक्षुओं को पाल प्रशिक्षण देने का कार्य करता है। जहाज के चालक दल में सात अधिकारी और 30 नाविक शामिल हैं, जिसमें एक समय में 30 कैडेटों के रहने की व्यवस्था है।
'तरंगिनी' नाम हिंदी शब्द 'तरंग' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'वह जो लहरों पर सवार हो।' यह पोत दुनिया की परिक्रमा करने वाला पहला भारतीय नौसैनिक जहाज होने का गौरव रखता है। यह उपलब्धि 2004 में हासिल की गई थी जब इसने 18 देशों के 37 बंदरगाहों की यात्रा करते हुए 35,000 समुद्री मील से अधिक की दूरी तय की थी। प्रवक्ता ने कहा कि आईएनएस तरंगिनी की यह यात्रा भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों और बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।



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