नयी दिल्ली। भारत (india) में ईरान (Iran) के राजदूत मोहम्मद फतली (Ambassador Mohamed Fathali) ने ईरान पर अमेरिका और इजराइल (America and Israel) के हमले को 'स्पष्टतया सैन्य हमला' ('Apparent military attack') करार देते हुए शनिवार को कहा कि उनका देश ऐसे बाहरी हमलों के खिलाफ अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करेगा।
श्री फतली ने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर एक बार फिर अमेरिका और जायोनी शासन ने हमला किया है। आज सुबह रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान उन्होंने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया। उन्होंने कई शहरों में टारगेट पर हमला किया, जिसमें सुरखा ढांचे और नागरिक इलाके शामिल हैं।" उन्होंने हमलों को 'स्पष्टतया सैन्य हमला'और कहा कि ये तब हुए जब ईरान और अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक राजनयिक प्रक्रिया में लगे हुए थे। उन्होंने कहा कि हालांकि ईरान को परमाणु मुद्दे को सुलझाने को लेकर अमेरिका के दावों पर पूरा भरोसा नहीं था, फिर भी ईरान ने बातचीत में हिस्सा लिया, ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी के पास युद्ध के लिए कोई बहाना न रहे।
श्री फतली ने कहा "हमारे शक के बावजूद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह दिखाने के लिए बातचीत जारी रखने का फैसला किया कि ईरान शांति चाहता है।"उन्होंने कहा कि ईरान ने 'युद्ध के लिए कोई बहाना न रहे' और यह दिखाने की कोशिश की थी कि उसने जिम्मेदारी से काम किया है, लेकिन अमेरिका और जायोनी शासन की मिली-जुली कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि वे भरोसेमंद नहीं हैं। इससे पता चलता है कि उनका असली मकसद अपने नाजायज फायदों को सुरक्षित करने के लिए दबाव डालना, धमकी देना और मिलिट्री हमला करना है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-51 का जिक्र करते हुए श्री फताली ने कहा कि ईरान को अपनी रक्षा करने का कानूनी अधिकार है। उन्होंने कहा, " संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-51 के तहत ईरान को अपनी रक्षा करने का कानूनी अधिकार है। एक आजाद देश के तौर पर ईरान अपनी क्षेत्रीय अखंडता, अपनी आजादी और अपने नागरिकों की जान की रक्षा के लिए सभी जरूरी विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।" उन्होंने कहा , "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना पूरी तरह तैयार हैं। जैसे हम बातचीत के लिए तैयार थे, वैसे ही अब हम रक्षा के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।"
उन्होंने कहा कि ईरान ने पड़ोसी और खाड़ी देशों के साथ 'दोस्ताना संबंध' बनाए रखे हैं और इलाके में स्थिरता चाहता है। उन्होंने कहा, "हम अपने पड़ोसियों की इज्जत करते हैं और अपने इलाके में स्थिरता चाहते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि ये देश मौजूदा हालात को समझेंगे और हमलावरों पर दबाव डालकर आगे बढ़ने से रोकने में मदद करेंगे।"
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से भी जवाब देने की अपील की। उन्होंने कहा, " अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस खतरनाक हालात पर जवाब देना चाहिए, जिससे वैश्विक शांति को खतरा है। इस ऐतिहासिक पल में, ईरान एकजुट है। रब पर विश्वास और अपनी राष्ट्रीय ताकत पर भरोसे के साथ हम मजबूती से अपने देश की रक्षा करेंगे। इतिहास गवाह है कि ईरानी कभी भी विदेशी हमले के आगे नहीं झुकते। इस बार भी कुछ अलग नहीं होगा।"



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