Court SIR: उच्चतम न्यायालय ने एसआईआर प्रशिक्षण मॉड्यूल को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्ति खारिज की!

Fri, Feb 27 , 2026, 07:06 PM

Source : Uni India

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की देखरेख करने वाले न्यायिक अधिकारियों के लिए जारी निर्वाचन आयोग के एक प्रशिक्षण मॉड्यूल के संबंध में राज्य सरकार की आपत्ति पर शुक्रवार को विचार करने से इनकार कर दिया । यह मामला 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' और 'अनमैप्ड' श्रेणियों में आने वाले व्यक्तियों के नामों पर दावों और आपत्तियों के निर्णय से संबंधित था। न्यायालय ने कहा कि घबराने का कोई कारण नहीं है और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ना चाहिए।

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने तत्काल सुनवाई याचिका के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने दलील दी कि न्यायिक अधिकारियों को एक मॉड्यूल दिया गया है जिसमें बताया गया है कि किन दस्तावेजों पर विचार करना है और किन पर नहीं, जबकि न्यायालय के पहले के आदेश में कहा गया था कि इसकी रूपरेखा कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा तय की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारी स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "कृपया प्रक्रिया को रोकने के लिए छोटे बहाने न बनाएं। इसे समाप्त होना चाहिए। न्यायिक अधिकारियों को काम करने दें। वे स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे।"

न्यायालय ने टिप्पणी की कि न्यायिक अधिकारियों को सौंपा गया कार्य उनके सामान्य न्यायिक कार्य का हिस्सा नहीं है और प्रक्रिया से परिचित कराने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा कुछ निर्देश असामान्य नहीं है। न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि न्यायालय के पहले के आदेश स्पष्ट थे और निर्वाचन आयोग का कोई भी निर्देश उन्हें दरकिनार नहीं कर सकता। पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को ऐसे कार्य करने के लिए कहा गया है जो उनके सामान्य कार्य और प्रशिक्षण से पूरी तरह अलग हैं। सिब्बल ने आरोप लगाया कि पहले के आदेशों द्वारा अनुमत कुछ पहचान दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है, जिसमें उप-मंडलीय अधिकारियों द्वारा जारी अधिवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate) शामिल हैं। पीठ ने जवाब दिया कि यदि अधिसूचना या उसके आदेशों के तहत अनुमत किसी भी दस्तावेज को गलत तरीके से खारिज किया जा रहा है, तो वह मामले की जांच करेगी।

श्री सिब्बल ने यह भी संकेत दिया कि एसआईआर कवायद के दौरान राज्य की मुख्य सचिव को भी अपनी साख स्थापित करने के लिए कहा गया था। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि वह इस स्तर पर और निर्देश पारित नहीं करेगा।इसके साथ ही यह भी नोट किया कि लगभग पूरी राज्य न्यायपालिका इस प्रक्रिया में लगी हुई है। न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि पूरक मतदाता सूचियां अद्यतन होते ही अपलोड की जाएं।

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