जलगांव: जनवरी 2026 में खानदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश हुई थी। इससे फसलों के साथ-साथ जानवरों पर भी असर पड़ा। केले की फसल पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा है। लेकिन क्योंकि उनके इंश्योरेंस प्रपोज़ल को मंज़ूरी नहीं मिली है, इसलिए केले की फसल के इंश्योरेंस होल्डर इस मुआवज़े से वंचित रह सकते हैं।
केले उगाने वाले किसानों ने अक्टूबर 2025 में मौसम पर आधारित फल फसल इंश्योरेंस स्कीम में हिस्सा लिया था। इस स्कीम के तहत 2025-26 सीज़न में नवंबर 2025 से जुलाई 2026 तक केले की फसलें कवर होती हैं।
एलिजिबल इंश्योर्ड पार्टिसिपेंट्स के इंश्योरेंस प्रपोज़ल स्कीम में हिस्सा लेने के एक महीने या उससे कम समय में मंज़ूर हो जाने चाहिए थे। लेकिन इंश्योरेंस कंपनी और एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट को शक था कि इस सीज़न में इस स्कीम में हिस्सा लेने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा है, इसलिए उन्होंने MR SAC के ज़रिए केले की फसल को वेरिफाई किया।
एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने कहा है कि करीब 44 हज़ार हेक्टेयर के इंश्योर्ड एरिया में केले की कोई फसल नहीं थी। उम्मीद है कि जिनके खेतों में केले हैं, उनके इंश्योरेंस प्रपोज़ल को मंज़ूरी मिल जाएगी। लेकिन इन प्रस्तावों को अभी तक मंज़ूरी नहीं मिली है।
बीमाधारकों ने मांग की है कि सरकार और बीमा कंपनी उन लोगों के बारे में अपने लेवल पर सही फ़ैसले लें जिन्होंने बिना केले की खेती किए हिस्सा लिया, ईमानदार केला उगाने वालों के बीमा प्रस्तावों को मंज़ूरी दें और उनके नुकसान का ध्यान रखें।



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Fri, Feb 27 , 2026, 08:18 AM