नयी दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (Independent Charge) डॉ. जितेंद्र सिंह (Dr. Jitendra Singh) ने रविवार को आंध्र प्रदेश के अमरावती में "अमरावती क्वांटम वैली" (Amaravati Quantum Valley) का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक इमारत की आधारशिला नहीं, बल्कि भारत के क्वांटम भविष्य की नींव है। उन्होंने कहा कि यदि भारत आने वाले दशकों में अपनी संचार प्रणाली, रक्षा सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा (healthcare) नवाचार और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आगे रहना चाहता है, तो क्वांटम प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करना अनिवार्य है।
इस अवसर पर क्वांटम वैली का लोगो जारी किया गया, आईबीएम और टीसीएस की क्वांटम क्लाउड सेवाओं का शुभारंभ हुआ, क्वांटम इनोवेशन सेंटर और क्वांटम टैलेंट हब की घोषणा की गई तथा कई उद्योग भागीदारों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। यह पहल उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के संयुक्त प्रयास का उदाहरण मानी जा रही है। इस अवसर पर समारोह में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी सहित उद्योग और शिक्षा जगत के कई वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री सिंह ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में तकनीक आधारित विकास की स्पष्ट दृष्टि दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के समन्वय से "डबल इंजन" मॉडल को मजबूती मिलती है और इससे बड़े वैज्ञानिक व तकनीकी प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने हाल ही में विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय महासागर विज्ञान केंद्र परियोजना के पूरा होने का भी उल्लेख किया और कहा कि यह भारत के डीप ओशन मिशन तथा ब्लू इकॉनमी को नई गति देगा।
श्री सिंह ने बताया कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास समर्पित "राष्ट्रीय क्वांटम मिशन" है। लगभग 6,000 करोड़ रुपये के इस मिशन के अंतर्गत देश के 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थान कार्य कर रहे हैं। मिशन के चार प्रमुख क्षेत्र क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग व मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम सामग्री और उपकरण हैं। इसका लक्ष्य आठ वर्षों के भीतर 1,000 फिजिकल क्यूबिट क्षमता वाला क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना, सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क बनाना तथा लगभग 2,000 किलोमीटर तक क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन स्थापित करना है। सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि क्वांटम तकनीक अगली औद्योगिक क्रांति का आधार बनेगी। क्वांटम एन्क्रिप्शन से डेटा सुरक्षा बेहद मजबूत होगी और साइबर हमलों से बचाव संभव होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में यह अभूतपूर्व सुरक्षा प्रदान करेगा, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र में सटीक रेडिएशन थेरेपी, तेज उपचार और बेहतर निदान संभव हो सकेगा। इसके अलावा उपग्रह संचार और संवेदन तकनीकों में भी बड़ा बदलाव आएगा।
श्री सिंह ने बताया कि देश में क्वांटम प्रौद्योगिकी से जुड़े बीटेक माइनर कोर्स शुरू हो चुके हैं और एमटेक कार्यक्रमों की तैयारी चल रही है। उन्नत अनुसंधान सुविधाएं और निर्माण अवसंरचना विकसित की जा रही हैं, जिनका लाभ स्टार्टअप, शोधकर्ता और शैक्षणिक संस्थान उठा सकेंगे। उन्होंने आईआईटी मद्रास के रिसर्च पार्क मॉडल की भी सराहना की, जिसे अब देशभर में अपनाया जा रहा है। सिंह ने कहा कि अलग-अलग होकर काम करने का दौर खत्म हो चुका है और सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत तथा स्टार्ट अप्स को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने से भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 8 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है और आने वाले वर्षों में इसके 45 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भारत की क्वांटम यात्रा पवित्र नगरी अमरावती से शुरू हो रही है और आंध्र प्रदेश विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण आधारशिला बनेगा। केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप नवाचार को बढ़ावा देने वाले राज्यों को पूरा सहयोग दिया जाएगा, जिससे भारत वैश्विक क्वांटम नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।



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