शिमला: हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) के अध्यक्ष विनय कुमार ने मंत्रियों, विधायकों और बोर्डों व निगमों के पदाधिकारियों को पार्टी की विचारधारा से हटकर बयान देने के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है, जिससे लगता है कि पार्टी अपने सत्ताधारी पदाधिकारियों के बीच बढ़ते सार्वजनिक मतभेदों को लेकर चिंतित है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के निर्देशों पर जारी एक पत्र में श्री कुमार ने स्पष्ट किया कि कोई भी नेता जिसके सार्वजनिक बयान पार्टी या राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, उसके खिलाफ बिना किसी पूर्व चेतावनी के कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं की हालिया टिप्पणियों ने पार्टी की आधिकारिक नीति का खुलेआम उल्लंघन किया है और इससे संगठन और सरकार दोनों को गंभीर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। पीसीसी प्रमुख ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने इस अनुशासनहीनता का कड़ा संज्ञान लिया है और एआईसीसी स्तर पर गहरी नाराजगी और असंतोष है। एचपीसीसी प्रमुख ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी मंत्री, विधायक, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को मीडिया, सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों के माध्यम से मतभेद व्यक्त करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
किसी भी उल्लंघन पर बिना किसी स्पष्टीकरण या माफी के तत्काल कार्रवाई की जायेगी। हालांकि पत्र में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन इसे व्यापक रूप से लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह की आईएएस और आईपीएस अधिकारियों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के अधिकारियों के कामकाज पर की गई टिप्पणियों से उपजे विवाद का परिणाम माना गया।
उनके बयानों से मंत्रिमंडल के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं, जिससे सत्ताधारी दल में स्पष्ट दरारें सामने आ गईं। मंत्रिमंडल मंत्री जगत सिंह नेगी, अनिरुद्ध सिंह और राजेश धरमानी ने सार्वजनिक रूप से श्री सिंह से असहमति जताई, जबकि शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने उनका बचाव करते हुए उन्हें एक कुशल मंत्री बताया।
यह बहस तब और भी उग्र हो गई जब पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने सिंह पर मौखिक हमला किया, जिसके जवाब में सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। यह सब एनएचएआई अधिकारियों पर कथित हमले के संबंध में अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मद्देनजर हुआ। कई कांग्रेस और युवा कांग्रेस के नेता भी बहस में शामिल हुए, जिससे आंतरिक मतभेद और भी स्पष्ट हो गया।
गुटबाजी के बयानों से शासन व्यवस्था पर खतरा मंडराने लगा था, ऐसे में अब पीसीसी नेतृत्व ने स्थिति को संभालने और अनुशासन लागू करने के लिए कदम उठाया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी अब आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक रूप से उजागर करना बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार में अनुशासनहीनता व्याप्त है, क्योंकि मंत्रियों का एक समूह अपने अधीन अधिकारियों के राज्य और जनता के हित में काम न करने की सार्वजनिक शिकायत करता है, जबकि दूसरा समूह नौकरशाही का बचाव करता है।



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Sat, Jan 24 , 2026, 07:47 AM