Status of Women in SIR: उप्र में मतदाता सूची पुनरीक्षण में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम अधिक कटे

Mon, Jan 19 , 2026, 02:59 PM

Source : Uni India

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी की गई प्रारूप मतदाता सूची (draft voter list)  में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के अधिक नाम हटाए जाने का खुलासा हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 1.55 करोड़ महिलाओं जबकि 1.34 करोड़ पुरुषों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इस तरह कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से विलोपित किए गए हैं। इस प्रक्रिया के बाद राज्य का लैंगिक अनुपात घटकर 824 महिला मतदाता प्रति 1000 पुरुष (male voters) रह गया है, जो 2025 की मतदाता सूची में 877 था। 6 जनवरी 2025 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची के अनुसार, कुल 12.55 करोड़ मतदाता बनाए रखे गए हैं, जिनमें 5.67 करोड़ महिलाएं और 6.89 करोड़ पुरुष शामिल हैं। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने दी।

महिलाओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए जाने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया , इसका प्रमुख कारण डुप्लीकेशन है। कई मामलों में महिलाओं के नाम पहले उनके मायके (पिता के पते) पर दर्ज थे और बाद में ससुराल (पति के पते) पर भी जुड़ गए थे। 2025 की मतदाता सूची में 25 वर्ष से अधिक आयु की 71.18 लाख महिलाओं ने पिता का पता दर्ज किया था, जो चुनाव आयोग की जांच के दायरे में थीं।

 इनमें से 42.15 लाख महिलाओं के नाम SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए, जबकि 29.4 लाख महिलाओं के नाम बरकरार रखे गए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी पुष्टि की कि शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक नाम कटे हैं। 2025 की मतदाता सूची में शहरी इलाकों में 4.16 करोड़ मतदाता थे, जो गणना चरण के बाद घटकर 2.99 करोड़ रह गए। यानी शहरी क्षेत्रों में 1.17 करोड़ मतदाताओं (28 प्रतिशत) के नाम हटाए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 11.28 करोड़ से घटकर 9.56 करोड़ रह गई है। यहां 1.27 करोड़ मतदाताओं (15.23 प्रतिशत) के नाम हटाए गए हैं।

वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग प्रारूप सूची में शामिल 12.55 करोड़ मतदाताओं में से 3.26 करोड़ को नोटिस जारी करेगा। इनमें 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनके नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे, जबकि 2.22 करोड़ मतदाताओं के विवरण में नाम, पता या माता-पिता के नाम से जुड़ी त्रुटियां पाई गई हैं। नोटिस भेजने की प्रक्रिया 14 जनवरी से शुरू हो चुकी है और 21 जनवरी से सुनवाई प्रारंभ होगी। इसके लिए 493 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और 8,751 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी तैनात किए गए हैं।

एसआईआर प्रक्रिया के दावे और आपत्तियों के चरण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने का कार्य भी जारी है। अब तक निर्वाचन आयोग को 20.73 लाख फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं। नए मतदाताओं के जुड़ने से लैंगिक अनुपात में सुधार की उम्मीद जताई गई है। गौरतलब है कि 6 जनवरी को प्रकाशित प्रारूप सूची में कुल 12.55 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए, जबकि 27 अक्टूबर 2025 को जारी सूची में यह संख्या 15.44 करोड़ थी। यानी मतदाता संख्या में 18.70 प्रतिशत की कमी आई है। यह संख्या राज्य में 2014 और 2019 के लोकसभा तथा 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों की मतदाता संख्या से भी कम है।

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