जयपुर: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जाति एवं गोत्र छिपाने के आरोपों से जुड़े एक मामले में राजस्थान में जयपुर की अपीलीय अदालत से भी राहत मिली है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) नीलम करवा की अदालत ने निचली अदालत के छह मई 2025 के आदेश को बरकरार रखते हुए मंगलवार को परिवादी की याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 19 फरवरी 2024 को दायर इस्तगासे को निचली अदालत द्वारा खारिज किया जाना विधिसम्मत था। अपीलीय अदालत ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इस मामले में परिवादी अधिवक्ता विजय कलंदर ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 153ए, 295ए और 505 के तहत प्रसंज्ञान लेने की मांग की थी।
परिवाद में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी स्वयं को कश्मीरी कौल ब्राह्मण जाति का बताते हैं, जो कथित तौर पर तथ्यात्मक रूप से गलत है। निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि यह न्यायालय किसी व्यक्ति की जाति और गोत्र निर्धारित करने की उपयुक्त संस्था नहीं है। साथ ही यह भी माना गया था कि लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नहीं आते। यह परिवाद छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री की जाति को लेकर दिए गए राहुल गांधी के कथित विवादित बयान के बाद दायर किया गया था।



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