नयी दिल्ली। भारतीय उर्वरक संघ (Fertilizer Association of India) के अप्रैल से नवंबर 2025 के लिए जारी अनंतिम आंकड़ों के आधार पर उद्योग जगत (Industry) ने देश की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में आए संरचनात्मक बदलावों को देखते हुए सरकार से एक अधिक मजबूत और दूरदर्शी नीतिगत ढांचे को बनाने की मांग की है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि घरेलू उत्पादन में गिरावट और मांग में वृद्धि के कारण यूरिया और डीएपी जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के लिए देश की आयात पर निर्भरता तेजी से बढ़ी है । इसी परिप्रेक्ष्य में उद्योग जगत ने आगामी बजट से पहले सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख अपेक्षाएं रखी हैं ताकि कृषि क्षेत्र में उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
एफएआई के अध्यक्ष एस. शंकरासुब्रमण्यन (S. Shankarasubramanian) ने आपूर्ति श्रृंखला के उभरते स्वरूप पर कहा कि यूरिया और डीएपी के लिए आयात पर बढ़ती निर्भरता रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन की जरूरत को बताती है। उन्होंने सरकार से एक ऐसी भविष्योन्मुखी आयात नीति बनाने का आग्रह किया है जो भविष्य की जरूरतों का पहले से आकलन कर सके और किसानों के लिए उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करे। इस "भविष्योन्मुखी आयात नीति" की आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि यूरिया और डीएपी की आयात पर निर्भरता पहले से अधिक है और ऐसा करना किसानों तक उर्वरकों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। उद्योग जगत का मानना है कि आयात अब केवल एक पूरक व्यवस्था नहीं बल्कि आपूर्ति श्रृंखला का एक स्थायी और संरचनात्मक हिस्सा बन गया है, जिसके लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर समन्वित योजना बनाने की आवश्यकता है । इसके लिए "रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन" का होना अनिवार्य है ।
एफएआई के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने डेटा-आधारित योजना और पोषक तत्वों के उपयोग में विविधीकरण पर जोर दिया है। उद्योग जगत चाहता है कि सरकार टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नीतियों का समर्थन करे जो केवल पारंपरिक उर्वरकों तक सीमित न रहकर मिट्टी और फसल की खास जरूरतों के अनुसार संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर आधारित हों । इसके साथ ही उद्योग ने स्वदेशी फास्फेटिक उर्वरकों जैसे सिंगल सुपर फॉस्फेट (Single Super Phosphate) के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए घरेलू उत्पादन क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए सरकारी प्रोत्साहन की भी अपेक्षा जताई है। भविष्य की जो योजनाएं बनें उसमें "डेटा-आधारित योजना" पर बल रहना चाहिए ताकि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाया जा सके ।
एफएआई ने सरकार और उद्योग के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई है ताकि नीतिगत निर्णयों में उद्योग के व्यावहारिक इनपुट को शामिल किया जा सके। उद्योग जगत सरकार से यह भी अपेक्षा रखता है कि आपूर्ति श्रृंखला में अधिक पारदर्शिता और साक्ष्य-आधारित संवाद और विकसित किया जाए ताकि राष्ट्रीय कृषि प्राथमिकताओं के अनुरूप समन्वित कार्रवाई की जा सके। उद्योग ने राष्ट्रीय कृषि प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाने के लिए "आपूर्ति श्रृंखला पारदर्शिता" बनाए रखने की मांग की है । उर्वरक क्षेत्र की "परिचालन दक्षता" बढ़ाना है ताकि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके ।
आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में यूरिया के आयात में 120 प्रतिशत और डीएपी के आयात में 54 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि घरेलू यूरिया उत्पादन में 3.7 प्रतिशत की गिरावट आई है । उद्योग का मानना है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार को आयात और घरेलू उत्पादन के बीच संतुलन बनाने के लिए दीर्घकालिक समाधानों पर ध्यान देना चाहिए। टिकाऊ कृषि का समर्थन करने के लिए उद्योग ने पोषक तत्वों के उपयोग में विविधता की मांग की है । यह संतुलित उर्वरीकरण को बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उद्योग का लक्ष्य सुनियोजित आयात के माध्यम से महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को सुरक्षित करने के साथ-साथ "घरेलू फास्फेटिक उत्पादन" को और मजबूत करना है। गौरतलब है कि एफएआई सरकार और उद्योग के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है और बेहतर नीतिगत निर्णय लेने के लिए "साक्ष्य-आधारित संवाद" और "नीतिगत इनपुट" प्रदान करना चाहता है।



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