Myopia Prevention Tips : क्या आपके बच्चे खुले आसमान को देखना भूल गए हैं? अगर ऐसा है, तो यह खबर आपके लिए बहुत ज़रूरी है। इन दिनों घर के अंदर रहने और लगातार स्क्रीन देखने की आदत बच्चों की आंखों को बीमार कर रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि 3 से 5 साल के बच्चे भी अब मायोपिया (Myopia) से पीड़ित हो रहे हैं। डॉ. वंदना गंगवार, डॉ. माधवी मिश्रा और डॉ. अभिषेक त्रिपाठी द्वारा की गई एक रिसर्च में बच्चों की आंखों के बारे में बहुत चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
बच्चों में बढ़ रही है मायोपिया की समस्या
तीन से पांच साल के बच्चों में मायोपिया की समस्या बढ़ रही है। अब तक अकेले आई हॉस्पिटल की सीतापुर ब्रांच में छह महीने में 10,239 मरीज देखे गए हैं। माता-पिता को इसके बारे में अलर्ट रहने की ज़रूरत है।
- डॉ. श्रीकांत वाइकर चीफ मेडिकल ऑफिसर, सीतापुर आई हॉस्पिटल
मोबाइल फोन बच्चों के दुश्मन बन गए हैं
डॉ. वंदना गंगवार कहती हैं कि इंसान का दिमाग शरीर की सभी एक्टिविटी को अपने हिसाब से करता है। एक तय समय के बाद दिमाग शरीर के अंगों को एक्टिविटी के हिसाब से चलाने लगता है। इसे ऐसे समझें, अगर आप 10-12 घंटे कंप्यूटर पर काम करते हैं और कोई फिजिकल एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो अचानक आपको दौड़ना पड़े, तो आप ज्यादा दूरी तय नहीं कर पाएंगे। यही नियम आंखों पर भी लागू होता है। अब बच्चे कभी भी खुले आसमान में नहीं सोते। कमरे की छत ज्यादा से ज्यादा 10 से 12 फीट ऊंची होती है। कमरे में रहते हुए बच्चे मोबाइल, टीवी या सीलिंग फैन देखते हैं। उनकी आंखों को दूर तक देखने की आदत नहीं पड़ती।
दवा से ज्यादा जरूरी है एक्सरसाइज
आंखों के डॉक्टर डॉ. नवनीत छाबड़ा के मुताबिक, मायोपिया के लिए सिर्फ विटामिन वाली दवाएं दी जाती हैं। इस बीमारी के इलाज में दवाओं से कहीं ज्यादा बड़ी भूमिका एक्सरसाइज की होती है। बच्चों को दूर की देखने की प्रैक्टिस के लिए बढ़ावा देना चाहिए। चांदनी रात में तारे ढूंढने से उनकी आंखों की एक्सरसाइज होती है, जिससे दूर की चीज़ों को देखने की उनकी काबिलियत बढ़ती है।
अलर्ट रहना सबसे ज़रूरी है।
अपने बच्चों के साथ दूर की चीज़ों को पहचानने की प्रैक्टिस करें।
धीरे-धीरे उनके मोबाइल फ़ोन देखने का समय कम करें।
आसमान में गेंद फेंकने और उसे पकड़ने की प्रैक्टिस करें।



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Wed, Dec 10 , 2025, 11:38 AM