Constitution Day: 26 नवंबर को क्यों मनाते हैं, और कैसे तैयार हुआ हमारा संविधान

Wed, Nov 26 , 2025, 02:46 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Constitution Day 2025 : आज हमें जिस आज़ादी, अधिकार और लोकतंत्र (Freedom, rights and democracy) पर गर्व है, उसकी नींव एक ऐतिहासिक दिन पर रखी गई थी, जब भारत को उसकी असली पहचान मिली थी। जी हाँ, हर साल 26 नवंबर को मनाया जाने वाला संविधान दिवस (Constitution Day) सिर्फ़ एक तारीख नहीं है, बल्कि उस लंबी और मुश्किल यात्रा की याद दिलाता है, जो तब शुरू हुई जब देश के महान नेताओं ने मिलकर भारत का संविधान तैयार किया - एक ऐसा डॉक्यूमेंट जो आज भी लाखों लोगों की ज़िंदगी को रास्ता दिखाता है।

संविधान दिवस क्यों मनाया जाता है?

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने अपनाया था। आज़ादी के बाद, देश को शासन के लिए एक मज़बूत और साफ़ सिस्टम की ज़रूरत थी और संविधान सभा को इसे बनाने का काम सौंपा गया था। दो साल, 11 महीने और 18 दिनों की लगातार मेहनत के बाद, संविधान को आखिरकार इतिहास में उसका आखिरी रूप दिया गया।

2015 में, भारत सरकार ने देश में संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए 26 नवंबर को ऑफिशियली संविधान दिवस घोषित किया। इस साल डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती भी थी, जो एक महान शख्सियत थे जिन्होंने संविधान बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

संविधान बनने का इतिहास

भारत की संविधान सभा 1946 में बनी थी और इसके प्रेसिडेंट देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। संविधान बनाने की मुख्य ज़िम्मेदारी डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अगुवाई वाली ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंपी गई थी।

1948 की शुरुआत में, डॉ. अंबेडकर ने संविधान का ड्राफ्ट तैयार किया और इसे लेजिस्लेटिव असेंबली में पेश किया। बहुत सोच-विचार, सुझाव और बहस के बाद, 26 नवंबर 1949 को संविधान को ऑफिशियली अपनाया गया। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और इसी दिन भारत एक रिपब्लिक बना, जिस दिन को हम हर साल रिपब्लिक डे के तौर पर मनाते हैं। भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखा हुआ संविधान माना जाता है, इसके इंग्लिश वर्शन में लगभग 1,17,360 शब्द हैं। इसकी पूरी जानकारी और डिटेल इसे दुनिया के सबसे अनोखे और बैलेंस्ड संविधानों में से एक बनाते हैं।

संविधान की मूल भावना क्या है?

भारत के संविधान की प्रस्तावना देश को एक सॉवरेन, सोशलिस्ट, सेक्युलर और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक घोषित करती है। इसका मकसद हर नागरिक को न्याय, आज़ादी, बराबरी और भाईचारा देना है, जिससे देश की एकता और अखंडता बनी रहे।

संविधान दिवस का महत्व

संविधान दिवस उन 271 सदस्यों की कड़ी मेहनत, दूरदृष्टि और लगन को सम्मान देने का मौका है जिन्होंने भारत का भविष्य बनाया। संविधान सिर्फ़ एक कानूनी डॉक्यूमेंट नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और बराबरी का एक मज़बूत ऐलान है जो सदियों से चले आ रहे भेदभाव और गैर-बराबरी को चुनौती देता है।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि डेमोक्रेसी की असली ताकत नागरिकों की भागीदारी और संवैधानिक मूल्यों का पालन करने में है। संविधान दिवस हमें न सिर्फ़ अपने अधिकारों बल्कि अपने कर्तव्यों को भी समझने के लिए प्रेरित करता है।

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