Yamuna Jal: यमुना का जल घर में क्यों नहीं रखा जाता? धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इसका सीधा संबंध यमलोक से है।

Fri, Aug 01 , 2025, 07:07 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Religious scriptures: हिंदू धर्म में, यमुना का नाम गंगा नदी (Yamuna river) के साथ भी लिया जाता है। क्योंकि यमुना नदी का महत्व गंगा नदी जितना ही है। यमुना नदी की पूजा (Yamuna river is worshipped) बड़ी श्रद्धा से की जाती है। हिंदू धर्म में यमुना नदी को देवी का दर्जा प्राप्त है। इस नदी को पाप नाश करने वाली, काल नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली कहा जाता है। लेकिन इस नदी का जल घर में रखना वर्जित है। क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका घर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, इस नदी के महत्व को केवल पूजा-पाठ या इसमें स्नान करने तक ही सीमित रखना उचित है। यह कोई प्रचलित मान्यता नहीं है। यमदेव, तर्पण और मृत्यु से जुड़ी बातें भी हैं। इस नदी का सीधा संबंध भगवान कृष्ण (Lord Krishna) से है। शास्त्रों के अनुसार, यमुना देवी सूर्यदेव की पुत्री और यमदेव की बहन हैं। इस नदी को कालिंदी भी कहा जाता है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, भौबीज के दिन, यमराज बहन यमुना के घर आते हैं। वह उन्हें आशीर्वाद भी देते हैं। यदि इस दिन भाई-बहन यमुना के जल में स्नान करें, तो उनकी अकाल मृत्यु नहीं होगी।

यमदेव से यमुना का सीधा संबंध
यमुना का सीधा संबंध यमदेव, यानी मृत्यु के देवता से है। इसलिए घर में यमुना का जल रखना वर्जित है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। इसी कारण गंगा जल को जीवनदायिनी माना जाता है। जबकि यमुना जल का उपयोग केवल व्रत रखने वालों के लिए तीर्थ के रूप में किया जाता है। यमुना नदी का उल्लेख गरुड़ पुराण और पद्म पुराण (Garuda Purana and Padma Purana) में भी मिलता है। स्नान और प्रायश्चित के लिए यमुना नदी में जाना चाहिए। इसलिए इस जल को घर में नहीं रखना चाहिए। क्योंकि यह मृत्यु, बीमारी और कलह का कारण बन सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यमुना का जल अस्थिरता का प्रतीक है। इसे घर में रखने से दरिद्रता और मानसिक क्लेश बढ़ता है।

कृष्ण और यमुना का संबंध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, तब वासुदेव उन्हें मथुरा से गोकुल ले जा रहे थे। उस समय यमुना ने उन्हें रास्ता दिखाया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यमुना ने बालकृष्ण के चरणों को स्पर्श करने के लिए अपना जलस्तर ऊपर उठाया और उनके पवित्र स्पर्श से पवित्र हो गईं। भगवान कृष्ण की लीलाओं का केंद्र वृंदावन और यमुना तट है। गोपियों के साथ रासलीला, कालिया नाग से युद्ध, माखन चोरी, ये सभी यमुना के तट पर ही घटित हुए। यमुना को भगवान कृष्ण की पत्नी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना को भगवान कृष्ण से वरदान प्राप्त है कि वह सदैव उनके चरणों में रहेंगी।

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