नोएडा। पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज करते हुए निषाद पार्टी (Nishad Party) ने रविवार को उत्तर प्रदेश के शो विंडो (Show Window) कहे जाने वाले नोएडा शहर स्थित नोएडा स्टेडियम (Noida Stadium) में विशाल सम्मेलन आयोजित किया। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक रैली नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और सामाजिक समीकरण साधने की सुनियोजित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
रविवार को आयोजित कार्यक्रम में डॉ. संजय निषाद ने संबोधन में कहा कि, पार्टी अब सिर्फ सहयोगी की भूमिका में सीमित नहीं रहना चाहती। उन्होंने कहा कि जहां सहयोगी दल—विशेषकर भाजपा—कमजोर स्थिति में होंगे, वहां निषाद पार्टी अपने उम्मीदवार उतारने पर विचार करेगी। उनका यह बयान 2027 के चुनाव से पहले संभावित सीट बंटवारे और गठबंधन की शर्तों को लेकर एक रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। डॉ. निषाद ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन दलों ने लंबे समय तक पिछड़े वर्गों की अनदेखी की है। उन्होंने दावा किया कि निषाद पार्टी ही इन वर्गों को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए संघर्ष कर रही है।
सुबह से ही पश्चिम उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों—मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बुलंदशहर और गाजियाबाद—से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का नोएडा पहुंचना शुरू हो गया। सम्मेलन स्थल पर भारी भीड़ ने यह संकेत दे दिया कि निषाद पार्टी अब क्षेत्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के मूड में है। इस सम्मेलन की सबसे अहम विशेषता रही निषाद, कश्यप और गुर्जर समाज को एक मंच पर लाने की कोशिश। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में यह सामाजिक गठजोड़ चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।
पिछड़े वर्गों (OBC) के भीतर इन समुदायों की अच्छी-खासी आबादी है, और इनका एकजुट होना कई सीटों पर निर्णायक असर डाल सकता है। पश्चिम यूपी में संगठनात्मक ताकत दिखाना, ओबीसी समुदायों के बीच पैठ मजबूत करना, सहयोगी दलों के साथ मोलभाव की स्थिति मजबूत करना,2027 चुनाव के लिए जमीन तैयार करना मुख्य मुद्दे हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश में पहले से ही जाट, मुस्लिम, दलित और अन्य पिछड़े वर्गों का जटिल सामाजिक समीकरण रहा है। ऐसे में निषाद, कश्यप और गुर्जर समाज का एक मंच पर आना नई राजनीतिक धुरी बना सकता है। यदि यह गठजोड़ चुनाव तक कायम रहता है, तो यह कई पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकता है और प्रमुख दलों के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है। नोएडा में हुआ यह सम्मेलन साफ तौर पर दर्शाता है कि निषाद पार्टी अब सीमित प्रभाव से आगे बढ़कर निर्णायक भूमिका निभाने की तैयारी में है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह शक्ति प्रदर्शन न सिर्फ पार्टी के आत्मविश्वास को दर्शाता है, बल्कि पश्चिम यूपी की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को भी जन्म देता है।



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Sun, Apr 05 , 2026, 07:34 PM