इतिहास और भूगोल से जुड़े सवाल-जवाब समझने के लिए जनरल नॉलेज (GK) का मज़बूत बेस होना ज़रूरी है। भारत में कई शहर अपने खास निकनेम से जाने जाते हैं, और ये नाम उन शहरों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाते हैं। ऐसा ही एक शहर है कांचीपुरम, जिसे ‘हज़ार मंदिरों का शहर’ के नाम से जाना जाता है। दक्षिण भारत का यह पुराना शहर अपने शानदार मंदिर आर्किटेक्चर, आध्यात्मिक परंपराओं और शिक्षा के सेंटर के तौर पर मशहूर है। आइए जानें कि इस शहर को यह खास नाम क्यों मिला और इसके पीछे क्या इतिहास है।
‘हज़ार मंदिरों का शहर’ के नाम से जाना जाता है
कांचीपुरम तमिलनाडु (Kanchipuram, Tamil Nadu) का ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अहम शहर है। यहाँ पुराने समय से ही कई मंदिर बने हुए हैं, इसीलिए इसे ‘हज़ार मंदिरों का शहर’ कहा जाता है। यह शहर हिंदू धर्म, फिलॉसफी और भक्ति परंपराओं का एक बड़ा सेंटर रहा है। पल्लव वंश, चोल वंश और विजयनगर साम्राज्य जैसे साम्राज्यों ने यहां करीब एक हजार मंदिर बनवाए थे। इसी वजह से कांचीपुरम को दक्षिण भारत की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है।
1500 साल का शानदार आर्किटेक्चर
कांचीपुरम और इसके आस-पास कई अनोखे मंदिर हैं। इन मंदिरों में खूबसूरत मूर्तियों, नक्काशी और पुरानी मूर्तियों का अनोखा मेल दिखता है। यहां मंदिर बनाने और धार्मिक परंपराओं में करीब 1500 सालों से लगातार बदलाव आ रहे हैं। खास तौर पर, विजयनगर साम्राज्य के दौरान बने एकंबरेश्वर मंदिर और वरदराज पेरुमल मंदिर आज भी अपने शानदार गोपुरम और मूर्तियों के लिए मशहूर हैं।
कांचीपुरम का इतिहास
कांचीपुरम पुराने (Kanchipuram Old) समय से ही एक खुशहाल और मशहूर शहर के तौर पर जाना जाता रहा है। यह शहर वेगवती नदी के किनारे बसा है। यह शुरू में चोल वंश और बाद में पल्लव वंश की राजधानी थी। पल्लव राजाओं ने यहां शानदार मंदिर, चौड़ी सड़कें और मजबूत किले बनवाए थे। महान कवि कालिदास ने कांचीपुरम को ‘सबसे महान शहर’ बताया था। 7वीं सदी के चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने भी इस शहर का दौरा किया था और इसकी शिक्षा और संस्कृति की तारीफ़ की थी। कुल मिलाकर, कांचीपुरम सिर्फ़ मंदिरों का शहर नहीं है, बल्कि भारत के समृद्ध इतिहास, आर्किटेक्चर और आध्यात्मिक परंपरा का जीता-जागता उदाहरण है।



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