मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार, रांकपा के विधायक अमोल मिटकरी, विधान परिषद सदस्य इदरीस नायकवाड़ी और विधायक संदीप क्षीरसागर की ओर से मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग के बाद बुधवार को भारी हंगामा देखने को मिला।
दक्षिण मुंबई के मरीन लाइन्स पुलिस थाने में मंगलवार को हुई घटना के बाद रोहित पवार ने 'एक्स' पर कहा, "अजीत दादा के विमान हादसे के संबंध में उचित कार्रवाई की प्रतीक्षा के बीच, कल एक डीजीसीए रिपोर्ट आई जिसमें वीएसआर वेंचर्स की लापरवाही को दुर्घटना का कारण बताया गया। चूंकि इस रिपोर्ट के आधार पर कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, इसलिए मैं, अमोल मिटकरी, इदरीस नायकवाड़ी और संदीप क्षीरसागर ने मरीन ड्राइव पुलिस थाने जाकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
तदनुसार, मेरा बयान भी लिया गया, लेकिन एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया और केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए एक आवेदन लिया।" पवार ने कहा, "पुलिस की इस कार्रवाई ने विमान हादसे के बारे में हमारे संदेह को और गहरा कर दिया है। यह वास्तव में महाराष्ट्र का दुर्भाग्य है कि विपक्षी दलों और सत्ताधारी दल के प्रतिनिधियों की मांग के बावजूद पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को नजरअंदाज कर दिया गया।
आगे उन्होंने कहा- इससे साफ पता चलता है कि सरकार और व्यवस्था किसी को बचा रही है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो क्या अजीत दादा को कभी न्याय मिलेगा? यह गंभीर संदेह पैदा करता है, लेकिन हम इस मामले को सामने लाए बिना चुप नहीं बैठेंगे। अजीत दादा को प्यार करने वाले हम सभी लोग गुरुवार सुबह नौ बजे प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बारामती तालुका पुलिस स्टेशन जाएंगे।"
घटना के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए श्री रोहित पवार ने कहा, "शुरुआत में पुलिस के साथ हमारी बहस हुई। हमारे वकीलों ने पुलिस को मामला समझाया। बाद में एक पुलिसकर्मी लैपटॉप लाया और मैंने अपना बयान टाइप करना शुरू किया। इस बीच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आए और उन्होंने हमें प्राथमिकी दर्ज करने से रोक दिया। उन्होंने हमें क्यों रोका? उस पुलिस अधिकारी को किसका फोन आया था? हमारा संदेह बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा लाए गए नए कानून के अनुसार हमें प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार है।"
सूत्रों के अनुसार जब यह घटना हुई तब पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) प्रवीण मुंडे पुलिस स्टेशन में मौजूद थे। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त भी वहां पहुंचे और उन्होंने प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया। पवार ने कहा, "हम देखेंगे कि सत्ता में बैठे नेता इस मामले में क्या फैसला लेते हैं।" बाद में रोहित पवार ने आरोप लगाया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अंततः सुरक्षा खामियों को स्वीकार करने से पहले चार्टर उड़ान संचालक वीएसआर वेंचर्स को 'क्लीन चिट' देने की कोशिश की थी।
विधान भवन परिसर में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए श्री पवार ने कहा कि 28 जनवरी को दोपहर 01ः36 बजे जारी डीजीसीए की रिपोर्ट में कहा गया था कि फरवरी 2025 में आयोजित ऑडिट के दौरान वीएसआर वेंचर्स के खिलाफ कोई 'लेवल-1' निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अजीत पवार के पार्थिव शरीर को अस्पताल ले जाया गया, तब डीजीसीए ने रिपोर्ट जारी की। यह वीएसआर को क्लीन चिट जारी करने का पहला प्रयास था।
उन्होंने कहा, "उड़ान योग्यता प्रमाण पत्र (एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट) किसने जारी किए? विमान के रखरखाव की देखरेख कौन करता है? हवाई सुरक्षा का ध्यान कौन रखेगा? सभी जिम्मेदारियां डीजीसीए की हैं। अगर वीएसआर की गलती है, तो डीजीसीए की भी गलती है।" उन्होंने यह भी कहा कि 28 जनवरी, जिस दिन दुखद विमान दुर्घटना हुई थी, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने दावा किया था कि वीएसआर वेंचर्स द्वारा संचालित लीयरजेट के साथ सुरक्षा संबंधी कोई चिंता नहीं थी और डीजीसीए द्वारा गहन मूल्यांकन के बाद सभी मंजूरी दी गई थी। पवार ने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेताओं और वीएसआर वेंचर्स के बीच वित्तीय संबंधों का आरोप लगाते हुए नायडू के इस्तीफे की मांग की।



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