नयी दिल्ली। केंद्रीय कौशल विकास (Skill Development) और उद्यमशीलता राज्य मंत्री जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में 'कैंपस टू मार्केट ( Campus to Market)- दिल्ली स्टार्टअप युवा फेस्टिवल 2026' का शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्री चौधरी ने कहा " भारत युवा देश है और हमारे पास युवाओं की बड़ी ताकत है। इसी वजह से हमारे काम करने की क्षमता बहुत अधिक है। लेकिन इस युवा शक्ति का सही फायदा तभी मिलेगा, जब हम युवाओं को आगे बढ़ने के मौके दें, उनकी प्रतिभा पहचानें और उनके कौशल को निखारें। पहले हमारी शिक्षा व्यवस्था ऐसी थी कि जो बच्चे पढ़ाई के पारंपरिक ढांचे में फिट नहीं बैठते थे, उनके लिए स्कूल और कॉलेज के रास्ते लगभग बंद हो जाते थे।"
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में भी सिर्फ किताबी पढ़ाई पर ही जोर दिया जाता था। पूरे सिस्टम में यही सोच थी कि केवल औपचारिक शिक्षा ही जरूरी है। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए इस सोच को बदला जा रहा है। आज जरूरत इस बात की है कि सिर्फ डिग्री पर नहीं, बल्कि बच्चों की काबिलियत पर ध्यान दिया जाए। यह तभी संभव है जब बच्चों को कौशल आधारित शिक्षा दी जाए, उन्हें अनुभव के जरिए सीखने के अवसर मिलें और वे बाहर की दुनिया को समझकर उससे सीख सकें।
श्रीमती गुप्ता ने कहा कि आज का युवा केवल 'जॉब सीकर' नहीं, बल्कि 'जॉब क्रिएटर' बन रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के छात्र-स्टार्टअप्स में असाधारण रचनात्मकता और इनोवेशन की क्षमता दिखाई दे रही है। यह वर्तमान समय की सामाजिक, पर्यावरणीय और तकनीकी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्टार्टअप और इनोवेशन का मजबूत इकोसिस्टम विकसित हुआ है, जिसने युवाओं को विचार से उद्यम तक की यात्रा के लिए आवश्यक मंच, नीति और सहयोग दिया है। दिल्ली सरकार भी इसी दिशा में शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को जोड़कर राजधानी को स्टार्टअप-कैपिटल ऑफ इंडिया बनाने की ओर तेजी से काम कर रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि देश के लिए समाधान रचने की भावना अपनाएं ताकि दिल्ली और भारत वैश्विक स्तर पर इनोवेशन का नेतृत्व कर सकें।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पहले दिल्ली में स्टार्टअप्स तो थे, लेकिन वे बिखरे हुए थे। न कोई स्पष्ट स्टार्टअप नीति थी और न ही छात्रों को उद्योग, मेंटर्स और निवेशकों से जोड़ने की व्यवस्थित व्यवस्था। शिक्षा और स्टार्टअप से जुड़ी पहलें तब केवल घोषणाओं तक सीमित थीं। अब यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है। दिल्ली सरकार स्कूल से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक ऐसा इकोसिस्टम विकसित कर रही है, जिसमें कौशल विकास, उद्यमिता और इनोवेशन को केंद्र में रखा गया है और सार्वजनिक व निजी संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप युवा फेस्टिवल इस बदलाव का उदाहरण है। इसके तहत पहली बार 11 विश्वविद्यालयों, 12 कॉलेजों और 19 आईटीआई को एक मंच पर जोड़ा गया है। 'कैंपस टू मार्केट' को अब व्यवस्थित रूप से लागू किया गया है, जिससे छात्रों को मेंटरशिप, फंडिंग और बाजार तक पहुंच मिल रही है। वर्तमान में 75,000 से अधिक छात्र और युवा उद्यमिता कार्यक्रमों से जुड़े हैं और 470 से ज्यादा स्टार्टअप्स इनक्यूबेशन में कार्यरत हैं।



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Wed, Jan 14 , 2026, 07:36 PM