दक्षिण एशिया के पॉलिटिकल और सिक्योरिटी बैलेंस में बड़ा बदलाव हो सकता है। यह सब एक संभावित डिफेंस डील की वजह से हो सकता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश (Pakistan and Bangladesh) के बीच एक प्रस्तावित डिफेंस एग्रीमेंट पर पॉलिटिकल और स्ट्रेटेजिक एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा हो रही है। इन सभी डेवलपमेंट्स को इंडिया के नज़रिए से सेंसिटिव माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के सीनियर मिलिट्री और इंटेलिजेंस अधिकारियों के ढाका दौरे बढ़े हैं। पाकिस्तान के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन, नेवी चीफ और ISI चीफ लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक (Asim Malik) भी बांग्लादेश के दौरे पर हैं। ये दौरे सिर्फ एक कर्टसी कॉल नहीं हैं, इन्हें एक बड़े स्ट्रेटेजिक एजेंडा के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ NATO-स्टाइल का आपसी डिफेंस एग्रीमेंट साइन करना चाहता है। इसमें यह प्रोविजन हो सकता है कि एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ भी ऐसा ही एक एग्रीमेंट साइन किया था। इसे इंडिया के खिलाफ स्ट्रेटेजिक बैलेंस बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं। इससे पहले, पाकिस्तान मुहम्मद यूनुस एडमिनिस्ट्रेशन (Pakistan Muhammad Yunus Administration) के दौरान इस एग्रीमेंट पर साइन करने की कोशिश कर रहा है। प्रस्तावित एग्रीमेंट का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए दोनों देशों के बीच एक जॉइंट मैकेनिज्म भी बनाया गया है। एग्रीमेंट में कॉन्फिडेंशियल जानकारी के एक्सचेंज और जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज जैसे प्रोविजन शामिल हो सकते हैं।
…तो भारत की सिक्योरिटी के लिए गंभीर खतरा
क्या इस एग्रीमेंट में न्यूक्लियर कोऑपरेशन शामिल होगा या नहीं? यह अभी साफ नहीं है। अगर ऐसा है, तो यह भारत की सिक्योरिटी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ जो एग्रीमेंट साइन किया है, उसमें न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्लैरिटी नहीं है। पाकिस्तान कन्फ्यूजिंग जवाब दे रहा है। फिलहाल, बांग्लादेश में काफी पॉलिटिकल अशांति है। वहां भारत के खिलाफ माहौल है। यह पाकिस्तान के लिए डील को आगे बढ़ाने के लिए एक अच्छी स्थिति है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग के एक सीनियर लीडर ने खुले मंच से भारत के खिलाफ बयान दिया। उन्होंने बांग्लादेश के साथ एक फॉर्मल मिलिट्री अलायंस की मांग की।
बांग्लादेश यूक्रेन की राह पर
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का मुख्य कारण NATO में शामिल होने की उनकी इच्छा है। NATO देशों के बीच एक एग्रीमेंट है। इसके अनुसार, एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) यूक्रेन के NATO में शामिल होने के खिलाफ थे। क्योंकि इससे NATO का विस्तार सीधे रूस की सीमाओं तक हो जाता। इसलिए पुतिन ने युद्ध का कदम उठाया।



Mahanagar Media Network Pvt.Ltd.
Sudhir Dalvi: +91 99673 72787
Manohar Naik:+91 98922 40773
Neeta Gotad - : +91 91679 69275
Sandip Sabale - : +91 91678 87265
info@hamaramahanagar.net
© Hamara Mahanagar. All Rights Reserved. Design by AMD Groups
Wed, Dec 24 , 2025, 10:49 AM