Foreign Exchange Management: रिजर्व बैंक ने विदेशी वाणिज्यिक उधारी के संशोधित नियम लागू किये!!

Tue, Feb 17 , 2026, 08:45 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

नयी दिल्ली: ECB के नियमों में महत्वपूर्ण ढील देते हुए विदेशी मुद्रा प्रबंधन (उधार और ऋण) (प्रथम संशोधन) विनियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्थाओं के लिए विदेशी पूंजी जुटाना आसान बनाना और वित्तीय लचीलापन बढ़ाना है। 

संशोधित नियमों के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
उधारी की सीमा में वृद्धि
: अब पात्र कंपनियां एक वित्तीय वर्ष में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर या अपनी कुल संपत्ति (Net Worth) का 300% (जो भी अधिक हो) तक उधार ले सकती हैं। पहले यह सीमा 750 मिलियन डॉलर प्रति वर्ष थी।

ब्याज दरों पर से कैप हटना: आरबीआई ने उधारी लागत (Cost of borrowing) पर लगी पुरानी सीमाओं (जैसे बेंचमार्क दर + 500 bps) को हटा दिया है। अब ब्याज दरें और अन्य खर्च बाजार की स्थितियों के अनुसार तय होंगे।

न्यूनतम औसत परिपक्वता: अधिकांश उधारियों के लिए न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि को 3 वर्ष के स्तर पर मानकीकृत (Standardize) किया गया है। विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) के लिए इसे 1-3 साल रखा गया है।

पात्र उधारकर्ताओं का विस्तार: पात्र उधारकर्ताओं और मान्यता प्राप्त ऋणदाताओं के आधार को बढ़ाया गया है ताकि अधिक भारतीय संस्थाएं विदेशी बाजारों तक पहुंच सकें।

उपयोग की अनुमति (End-use): फंड के उपयोग के नियमों को सरल बनाया गया है।

हालांकि, रियल एस्टेट गतिविधियों, चिट फंड और स्टॉक मार्केट में निवेश जैसे कुछ क्षेत्रों में इसके उपयोग पर प्रतिबंध जारी रहेंगे। ये नियम भविष्य की सभी उधारियों पर लागू होंगे और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को भी सरल बनाया गया है ताकि अनुपालन का बोझ कम हो सके।

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