मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-अजित पवार समूह) की नेता एवं राज्य की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सोमवार को यहां पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की पवार ने पिछले हफ्ते पार्टी के नेता और खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण मंत्री नरहरि ज़िरवाल के कार्यालय पर भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी ) कीे छापे और कार्यालय बंद किये जाने से पैदा हुए राजनीतिक हालात का जायज़ा लिया। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना और कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर ज़िरवाल के इस्तीफे की मांग की है।
इस बीच एसीबी ने नासिक ज़िले में आरोपी लिपिक राजेंद्र धेरंगे के घर पर छापा मारा, जो कथित तौर पर पिछले हफ्ते रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था, जिससे राकांपा पर भारी दबाव पड़ा है। एसीबी द्वारा गिरफ्तार किये गये आरोपी लिकिप धेरंगे को कल यहां अदालत में पेश किया गया। अभी तक विधायक अमोल मिटकरी के अलावा राकांपा का कोई भी नेता ज़िरवाल के बचाव में नहीं आया है। श्री मिटकरी ने कहा है कि जिरवाल को इस मामले में फंसाया गया है। मिटकरी ने पिछले हफ़्ते कहा था, "ज़िरवाल बेगुनाह हैं। उन्हें इस मामले में फंसाने का ठेका किसने लिया, इसकी विस्तृत जानकारी बहुत जल्द सामने आ जाएंगी। ज़िरवाल राकांपा के वरिष्ठ नेता हैं और आदिवासी समुदाय के आम लोगों का चेहरा हैं। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।"
वहीं राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि श्री ज़िरवाल को उनके दफ्तर पर एसीबी के छापे के बारे में अंधेरे में क्यों रखा गया और छापा उस समय पर जब वह दिल्ली में थे। सूत्रों ने कहा कि चूंकि एसीबी का छापा महाराष्ट्र राज्य सचिवालय भवन (मंत्रालय) के परिसर में पड़ी थी, , इसलिए ज़ाहिर है कि इसके लिए गृहमंत्रालय से हरी झंडी मिली थी, जिसके प्रमुख खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं, जिनका कार्यालय मंत्रालय की दूसरी मंज़िल पर श्री ज़िरवाल के कार्यालय से मुश्किल से कुछ गज की दूरी पर है।
सूत्रों ने कहा कि राजनीतिक अंदाज़ा यह है कि चूंकि छापा श्री फडणवीस की हरी झंडी के बिना होने की उम्मीद नहीं है, इसलिए इसमें जो दिख रहा है उससे कहीं ज़्यादा कुछ है और रेड के पीछे के इरादे के बारे में कई सिद्धांत चर्चा हो रही है, जिसमें एक थ्योरी यह भी है कि यह राकांप और श्रीमती पवार को बैकफुट पर लाने की चाल हो सकती है ताकि इस शर्मनाक घटना का इस्तेमाल राजनीतिक मोलभाव के लिए किया जा सके। सूत्रों ने बताया, "गृह विभाग के प्रशासनिक प्रमुख अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह विभाग ) मनीषा म्हैसकर ने एसीबी के छापे वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया था और फिर भी श्री ज़िरवाल को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। इसके अलावा, एसीबी की टीम पिछले हफ़्ते दो बार मंत्रालयों के कार्यालयों में गयी थी।"
सूत्रों ने कहा, "एसीबी छापे का समय भी अजीब है, खासकर यह देखते हुए कि श्री ज़िरवाल राकांपा के दो दो समूहों को आपस मिलाने के बारे में खुलकर बोलते रहे हैं।" इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अपनी सहयोगी अजित पवार की राकांपा और श्रीशरद पवार की राकांपा के किसी भी संभावित मर्जर को लेकर भारी बेचैनी है। गत गुरुवार को एसीबी ने राज्य सचिवालय में ज़िरवाल के दफ्तर के लिपिक राजेंद्र धेरंग को एक केमिस्ट से उसका लाइसेंस निलंबन को रद्द करने के लिए 35,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। धेरंग नासिक जिले में श्री ज़िरवाल के चुनाव क्षेत्र से हैं और मूल रूप से राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के के कर्मचारी हैं।
सूत्रों ने कहा कि फडणवीस और पवार दोनों इस बात को लेकर संशय में हैं कि ज़िरवाल को उनके पद पर रहने दिया जाए या उनसे इस्तीफा दिलवाया जाए। अगर ज़िरवाल को इस्तीफा देने के लिए कहा जाता है, तो विपक्ष फडणवीस सरकार को भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगायेगा और उसके आरोपों का बढ़ा बल मिलेगा। उल्लेखनीय है कि राकांपा नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व खेल मंत्री मानिकराव कोकाटे पहले ही 1995 के जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले में दो साल की जेल हो चुकी है। उन्हें 18 दिसंबर, 2025 को इस्तीफा देना पड़ा था। उससे भी पहले राकांपा नेता एवं पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री धनंजय मुंडे को भी मासाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या में कथित तौर पर शामिल होने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था। दूसरी ओर, अगर ज़िरवाल को मिनिस्टर बने रहने दिया जाता है, तो विपक्ष इसका इस्तेमाल फडणवीस सरकार की बुराई करने के लिए करता रहेगा।



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