Sutak period: ग्रहण से पहले सूतक क्यों लगता है? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं और ज़रूरी नियम!

Mon, Feb 16 , 2026, 09:04 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Surya Grahan 2026 Sutak Kaal: हिंदू धर्म और शास्त्रों में, सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) से पहले के समय को ‘सूतक काल’ (Sutak period) कहा जाता है। इस समय को अशुद्धता और नेगेटिविटी का माना जाता है। इसलिए, साल के पहले सूर्य ग्रहण, जो कल, 17 फरवरी, 2026 को लगेगा, से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो गया है। शास्त्रों के अनुसार, जब सूर्य देव पर राहु का असर बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में नेगेटिव एनर्जी फैलने लगती है। सूतक काल का मुख्य मकसद खुद को इस नेगेटिविटी से बचाना और आत्मिक शुद्धि देना है। इस दौरान धैर्य और सावधानी बरतने से जीवन में आने वाली परेशानियों से बचने का अच्छा मौका मिलता है। तो, आज के इस आर्टिकल में, आइए ग्रहण से पहले सूतक काल मानने के धार्मिक महत्व और नियमों के बारे में जानें।

सूतक काल के दौरान क्या करना अच्छा है?

सूतक काल के दौरान शारीरिक गतिविधियां करने से बेहतर है कि मन को शांत रखें और भगवान का ध्यान करें। इस सूतक काल में अपने घर और मन में पॉजिटिविटी बनाए रखने के लिए चुपचाप अपने पसंदीदा देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप करें। सूतक काल शुरू होने से पहले दूध, दही और पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते डाल दें। तुलसी में नेगेटिव एनर्जी को रोकने की अनोखी ताकत होती है, जिससे खाना शुद्ध रहता है। इस समय धार्मिक किताबें पढ़ना और शांति से आत्मचिंतन करना आपकी मानसिक ताकत बढ़ाने में बहुत मदद कर सकता है।

सूतक काल के दौरान किन चीज़ों से बचना चाहिए?
सूतक काल को पवित्र नहीं माना जाता है, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल के दौरान भगवान की मूर्तियों को छूना या उनकी पूजा करना मना है। इस दौरान खाना बनाने और खाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि सूरज की कम ताकत आपके पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकती है। साथ ही, सूतक के दौरान सोना, नाखून काटना या कैंची और चाकू जैसी नुकीली चीज़ों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को खास तौर पर इस दौरान ज़्यादा ध्यान रखने और घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है।

सूतक काल खत्म होने के बाद घर की शुद्धि और दान करने का महत्व
जैसे ही ग्रहण खत्म होता है, सूतक काल का असर भी खत्म हो जाता है। इसके तुरंत बाद शुद्धि की रस्में करना बहुत ज़रूरी है। सबसे पहले अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर नहाएं और फिर पूरे घर में गंगाजल या गोमूत्र छिड़कें। किचन को अच्छी तरह साफ करें और ताज़ा खाना बनाएं, क्योंकि सूतक के दौरान बनाया गया खाना अशुद्ध माना जाता है। ग्रहण के बाद किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति को अनाज या कपड़े दान करना बहुत ही पुण्य का काम माना जाता है। ऐसा करने से आपको सूर्य देव का आशीर्वाद मिलेगा और आपके जीवन की परेशानियां दूर होने लगेंगी।

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