EPFO Pension Scheme:  EPFO ' पीएफ कर्मचारियों को हर महीने देता है पेंशन! ईपीएस योजना वास्तव में क्या है? पढ़ें पूरी जानकारी

Sat, Jun 08 , 2024, 02:22 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

EPFO: जिस तरह सरकारी क्षेत्र (government sector) में कई कर्मचारी काम करते हैं, उसी तरह निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी (large number of employees) काम करते हैं। लेकिन निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को अभी भी ईपीएफओ की पेंशन योजना (pension scheme of EPFO) के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।

निजी क्षेत्र का कर्मचारी जिस कंपनी में काम करता है, उसके माध्यम से किया जाने वाला अधिकांश ईपीएफ योगदान कर्मचारी पेंशन योजना (Employees' Pension Scheme) यानी ईपीएस में जमा किया जाता है। क्योंकि हम जानते हैं कि कई कर्मचारियों का वेतन कम होता है और वे बहुत सारा पैसा नहीं बचा पाते हैं और जाहिर तौर पर अपनी सेवानिवृत्ति के बाद वे अपनी आगे की आजीविका के लिए बहुत सारा पैसा निवेश करने में सक्षम नहीं होते हैं।

ऐसे कर्मचारियों को हर महीने आय का कोई न कोई साधन मिलता रहे, इसके लिए कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस 95 शुरू की गई है। इस योजना के नियमों पर नजर डालें तो कर्मचारियों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 12 फीसदी योगदान ईपीएफ में जमा होता है।

कर्मचारियों के वेतन से काटी गई 12 प्रतिशत राशि उनके पीएफ खाते (PF account) में जमा की जाती है, जबकि कंपनी या संगठन द्वारा किया गया योगदान पूरी तरह से ईपीएफ में नहीं जाता है, बल्कि दो भागों में बांटा जाता है। यानी इस राशि का 3.67% पीएफ खाते में जमा होता है और शेष 8.33% राशि पेंशन खाते में जमा होती है।

ईपीएस योजना वास्तव में क्या है?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organization) ने ईपीएफ खाताधारकों के लिए ईपीएस योजना शुरू की है और इससे कई कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिल रहा है। और कर्मचारी के 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के बाद, योजना मासिक पेंशन (monthly pension) प्रदान करती है। लेकिन इस योजना का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलता है जो कम से कम 10 साल से कार्यरत हैं या जिन्होंने लगातार 10 साल तक ईपीएफ खाते में योगदान दिया है।

कर्मचारियों की पेंशन राशि कैसे निर्धारित की जाती है?
हमारे सामने एक बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारियों को पेंशन की राशि कैसे निर्धारित की जाती है। लेकिन इसके लिए ईपीएफ के पास एक फॉर्मूला है और इसका इस्तेमाल करके कर्मचारियों की पेंशन राशि निर्धारित की जा सकती है। यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि बीस वर्ष है तो उसमें दो वर्ष बोनस के रूप में जोड़े जाते हैं। साथ ही वर्ष की गणना राउंड फिगर संख्याओं में की जाती है।

उदाहरण के लिए, यदि कर्मचारियों की पेंशन योग्य सेवा दस वर्ष और छह महीने है, तो पूर्णांक को ग्यारह वर्ष तक पूर्णांकित किया जाता है। इस फॉर्मूले को एक उदाहरण से समझना हो तो मान लीजिए किसी कर्मचारी की एक साल की औसत सैलरी बेसिक प्लस डीए (basic plus DA) पंद्रह हजार रुपये है और पेंशन योग्य रोजगार अवधि 21 साल है तो 15000 को 21 साल की रोजगार अवधि से भाग देने पर 15000 हो जाता है। 70 तक संबंधित कर्मचारी को साढ़े चार हजार रुपये पेंशन मिलेगी।

ईपीएस योजना 1995 से शुरू की गई थी और वर्तमान में न्यूनतम पेंशन रु. महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि पीएफ सदस्य या पीएफ धारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी मृत्यु के बाद पत्नी को और यदि पत्नी नहीं है, तो बच्चों को यह पेंशन लाभ मिलता रहता है। साथ ही, पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद परिवार के जीवित बच्चों को भी यह पेंशन लाभ मिलता रहता है मासिक बाल पेंशन का लाभ।

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