मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पश्चिम एशिया संकट (crisis in West Asia) के कारण आर्थिक वृद्धि प्रभावित होने और खुदरा महंगाई बढ़ने (retail inflation might rise) की आशंका जाहिर करते हुए मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बुधवार को समाप्त बैठक में नीतिगत दरों को स्थिर रखने तथा 'इंतजार करो और नजर रखो' की नीति अपनाने का फैसला किया।
एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय किया। साथ ही अपना रुख तटस्थ बनाये रखा है। साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी रेट पांच प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट तथा बैंक रेट 5.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहेगी। वित्त वर्ष 2026-27 में और पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत के बाद हुई एमपीसी की पहली बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों और उनके घरेलू असर को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में सात प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि ईंधन और अन्य कॅमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष में उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर रहेगी। चारों तिमाहियों में इसके क्रमशः चार प्रतिशत, 4.4 प्रतिशत, 5.2 प्रतिशत और 4.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। जोखिम इसके ऊपर की ओर बढ़ने का अधिक है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर नकारात्मक जोखिम बढ़ रहे हैं क्योंकि ईंधनों की कीमतों में तेज वृद्धि और विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति में कमी के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न अनिश्चितता आर्थिक परिदृश्य पर दबाव डाल रही है। वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, शेयर बाजारों में व्यापक गिरावट दर्ज की गयी है, और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ गये हैं।
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति अभी नियंत्रण में है और लक्ष्य से नीचे है, लेकिन ईंधन की कीमतों में वृद्धि और मौसम से संबंधित संभावित व्यवधानों के कारण भविष्य में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि खाद्य पदार्थों की कीमतें अभी स्थिर हैं, लेकिन भविष्य में अल नीनो जैसी परिस्थितियां जोखिम पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा, "ईंधन की बढ़ती कीमतें, परिवहन लागत और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आर्थिक वृद्धि को कमजोर कर सकते हैं। सरकार ने निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला को समर्थन देने के लिए कई कदम उठाये हैं, जिससे नकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है।"
मल्होत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि देश की व्यापक आर्थिक बुनियाद मजबूत है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल हो हैं। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में इन जोखिमों से निपटने में कहीं अधिक सक्षम है। अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया संकट के प्रभावों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से आयातित वस्तुओं की मुद्रास्फीति बढ़ सकती है, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा से उत्पादन प्रभावित हो सकता है, वैश्विक अनिश्चितता से निवेश और खपत घट सकती है और वैश्विक विकास में कमी से निर्यात प्रभावित हो सकता है।



Mahanagar Media Network Pvt.Ltd.
Sudhir Dalvi: +91 99673 72787
Manohar Naik:+91 98922 40773
Neeta Gotad - : +91 91679 69275
Sandip Sabale - : +91 91678 87265
info@hamaramahanagar.net
© Hamara Mahanagar. All Rights Reserved. Design by AMD Groups
Wed, Apr 08 , 2026, 12:31 PM