Nepal Prime Minister Changes: 'जेन-जी' क्रांति हुई सफल; बदले नेपाल के प्रधानमंत्री!

Sat, Mar 28 , 2026, 08:58 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

काठमांडू: नेपाल में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने बालेंद्र शाह (35) को शुक्रवार को दोपहर में राष्ट्रपति निवास (शीतल निवास) में आयोजित एक सादे समारोह में प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। शाह के देश के शीर्ष पद पर पहुंचने में सबसे बड़ी भूमिका नयी पीढ़ी जेन-जी के आंदोलन की रही है। उनकी नियुक्ति को नेपाल में पारंपरिक राजनीति के अंत और युवा शक्ति के उदय के रूप में देखा जा रहा है। शाह नेपाल के इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने हैं। राष्ट्रपति ने संविधान की धारा 76(1) के तहत शाह (35) को शुक्रवार को नेपाल का 47वां प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हिंदू बटुकों के मंत्रोच्चार और बौद्ध भिक्षुओं के अष्टमंगल पाठ के साथ एक अनूठा सांस्कृतिक संगम देखने को मिला। समारोह में विभिन्न देशों के राजनयिक और नेपाल के वरिष्ठ राजनेता भी मौजूद रहे जिन्होंने नए नेतृत्व का स्वागत किया। शपथ के तुरंत बाद बालेन ने राष्ट्र के नाम अपने पहले संक्षिप्त संबोधन में एकता और विकास का संकल्प जताया। बालेन के साथ 14 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिससे 15-सदस्यीय नई कैबिनेट का औपचारिक गठन हो गया है। श्री बालेन ने रक्षा और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय अपने पास रखे हैं ताकि वे रणनीतिक सुधारों पर सीधा नियंत्रण रख सकें।

युवाओं से भरपूर इस कैबिनेट की खास बात यह है कि इसमें अनुभवी विशेषज्ञों और उत्साही युवाओं का एक संतुलित मिश्रण तैयार किया गया है। मंत्रिपरिषद की औसत आयु मात्र 38 वर्ष है। यह नेपाल के इतिहास के सबसे युवा मंत्रिमंडलों में से एक है, जिसमें 10 मंत्री 40 वर्ष से कम आयु के हैं। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और हार्वर्ड से शिक्षित स्वर्णिम वाग्ले को नेपाल का नया वित्त मंत्री नियुक्त किया गया है। उन पर नेपाल की चरमराई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करने की भारी जिम्मेदारी है। वाग्ले की नियुक्ति से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और निवेशकों के बीच नेपाल की आर्थिक साख बढ़ने की उम्मीद है। 

पदभार संभालते ही उन्होंने देश के वित्तीय ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन करने का संकेत दिया है। 'जेन-जी' आंदोलन के प्रमुख चेहरे सुदन गुरुंग को देश का नया गृह मंत्री बनाकर बालेन ने सभी को चौंका दिया। सुदन को नागरिक सुरक्षा और पुलिस प्रशासन में आधुनिक सुधार लागू करने के विशेष मिशन के साथ यह जिम्मेदारी दी गई है। वे नेपाल के इतिहास के सबसे कम उम्र के गृह मंत्री हैं, जो युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर काम करने की घोषणा की है।

पार्टी के रणनीतिकार शिशिर खनाल को विदेश मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। पदभार संभालने के बाद खनाल ने कहा है कि नेपाल की विदेश नीति अब "राष्ट्र प्रथम" के सिद्धांत पर आधारित होगी, जिसमें आर्थिक कूटनीति को प्राथमिकता दी जाएगी। कार्यभार संभालने के तुरंत बाद बालेन ने सिंह दरबार में पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की, जो करीब दो घंटे तक चली। इस बैठक में शासन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और सरकारी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने '100 त्वरित निर्णयों' की एक सूची तैयार की है जिसे अगले कुछ हफ्तों में धरातल पर उतारा जाएगा। 

बैठक के बाद बालेन ने कहा कि उनकी सरकार केवल वादों के बजाय ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इन सौ फैसलों की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गयी है। अपनी नियुक्ति से कुछ घंटे पहले बालेन ने 'जय महाकाली' नामक एक रैप सॉन्ग रिलीज कर अपने समर्थकों को एक खास संदेश दिया। इस गाने के माध्यम से उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और देश की अखंडता की रक्षा करने का अपना संकल्प दोहराया। यह पहला मौका है जब किसी प्रधानमंत्री ने संगीत के माध्यम से अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति और लक्ष्यों को जनता के सामने रखा है। सोशल मीडिया पर यह गाना कुछ ही घंटों में वायरल हो गया और युवाओं के बीच नई ऊर्जा भर दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाह के प्रधानमंत्री बनने पर फोन कर बधाई दी और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। मोदी ने भारत-नेपाल के सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बालेन ने भी इस बधाई के लिए आभार जताते हुए कहा कि भारत नेपाल का एक अनिवार्य और भरोसेमंद विकास भागीदार है। चीन और अन्य यूरोपीय देशों ने भी नए युवा नेतृत्व के साथ काम करने की उत्सुकता जाहिर की है।

शपथ ग्रहण के बाद बालेन आधिकारिक कार्यालय 'सिंह दरबार' पहुंचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने उसी मेज पर बैठकर कार्यभार संभाला जिसे पिछले साल विरोध प्रदर्शनों के दौरान आंदोलित जनता ने घेर लिया था। बालेन ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब दफ्तरों में फाइलों को रोकने की संस्कृति को हमेशा के लिए खत्म करना होगा। उन्होंने सिंह दरबार को आम जनता के लिए अधिक सुलभ और जवाबदेह बनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने भ्रष्टाचार के पुराने और लंबित मामलों की फाइलों को फिर से खोलने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया।

नेपाल की नई सरकार में मंत्रियों का चयन पारंपरिक राजनीतिक वफादारी के बजाय उनकी विषय विशेषज्ञता के आधार पर किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा जैसे मंत्रालयों में उन लोगों को जगह दी गई है जो संबंधित क्षेत्रों के माहिर माने जाते हैं। इस मॉडल की नेपाल के नागरिक समाज और बुद्धिजीवियों ने काफी सराहना की है, जो लंबे समय से योग्य नेतृत्व की मांग कर रहे थे। बालेन का मानना है कि विशेषज्ञ ही जटिल राष्ट्रीय समस्याओं का प्रभावी और वैज्ञानिक समाधान निकाल सकते हैं।

बालेन के प्रधानमंत्री बनने की खबर मिलते ही दक्षिणी नेपाल के तराई (मधेस) क्षेत्र में जश्न का माहौल छा गया। उनके गृह निर्वाचन क्षेत्र झापा-5 सहित कई शहरों में लोगों ने दीपावली मनाई और मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके नेतृत्व में मधेस क्षेत्र की समस्याओं को केंद्र में उचित प्राथमिकता और समाधान मिलेगा।

इससे पहले निवर्तमान अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने आज सुबह राष्ट्र के नाम अपना विदाई संबोधन दिया और बालेन को बधाई दी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने और चुनावों को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए जनता का आभार जताया। कार्की ने नए युवा नेतृत्व को देश की बागडोर सौंपते हुए लोकतंत्र की मजबूती के लिए उनके सफल होने की कामना की। उन्होंने बालेन से अपील की कि वे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का हमेशा सम्मान करें।

नेपाल की नई सत्ता संरचना में रवि लामिछाने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष के रूप में संगठन की कमान संभाल रहे हैं। फिलहाल वे स्वयं कैबिनेट का हिस्सा नहीं हैं और सरकार की रणनीति तय कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जहाँ शाह सरकार के कार्यकारी प्रमुख और सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं, वहीं लामिछाने पार्टी मशीनरी के मुख्य रणनीतिकार और दूसरे बड़े शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित हैं।

शाह के शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति पौडेल के अलावा उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव, मुख्य न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह राउत, और विभिन्न देशों के राजनयिक व सुरक्षा प्रमुख शामिल हुए। सुरक्षा और प्रोटोकॉल कारणों से आम जनता को प्रवेश नहीं मिला। पारंपरिक राजनीतिक दलों के कुछ वरिष्ठ दिग्गज भी इस समारोह से दूरी बनाते नजर आए।

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