नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया मान रही है कि सिर्फ भारत ही पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म कर सकता है। भागवत ने नागरपुर में विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत के कार्यालय का शिलान्यास करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए दुनिया में संघर्षों की असली वजह स्वार्थ और वर्चस्व की चाहत है।
स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म को मानने से ही हासिल की जा सकती है। इस दौरान उन्होंने विभिन्न देशों की ओर से इस युद्ध को रोकने के लिए भारत को दखल देने के लिए कहने का हवाला दिया है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात और फिनलैंड सबसे आगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का स्वभाव ही ऐसा है जो सद्भाव में विश्वास रखता है। यही कारण है कि पूरी दुनिया से यह आवाज उठ रही है कि भारत ही ईरान-इजरायल युद्ध को खत्म करने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि विश्व के कई देशों ने यह भावना जाहिर कि है कि जिस तरह से भारत के अमेरिका और इजरायल से अच्छे संबंध हैं और ईरान के साथ भी सदियों पुरानी मित्रता है, इसमें ही यह क्षमता है, जो दोनों पक्षों के बीच दखल देकर जंग को रोकवा सकता है। इस दौरान उन्होंने वैश्विक संघर्ष की जड़ का उल्लेख किया और कहा कि सौहार्द के माध्यम से इसका समाधान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि युद्ध स्वार्थी हितों का परिणाम है, दुनिया को सद्भाव चाहिए, संघर्ष नहीं। संघ प्रमुख ने कहा कि भारत और दुनिया की सोच में अंतर बताते हुए कहा, "भारत के लोग मानवता के कानून का पालन करते हैं, लेकिन बाकी दुनिया जंगल के कानून का पालन करती है। धर्म का आधार देकर लड़खड़ाते हुए विश्व में संतुलन कायम करना हमारा कर्तव्य है।"



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