Desi Cow Conservation :महाराष्ट्र में देशी गायों की संख्या में 20 फीसदी की गिरावट...ये हैं पांच कारण!

Mon, Sep 30 , 2024, 07:39 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Decline in the number of native cows: राज्य में देशी गायों (Native Cows) की संख्या में गिरावट के कारण राज्य सरकार (Reason State Government) ने उनके संरक्षण के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है। इसके अनुसार राज्य में देशी गायों को राज्य गौमाता का दर्जा घोषित किया गया है। इसके अलावा, गौशालाओं (Gaushalas) में भर्ती गायों को प्रति गाय 50 रुपये की सब्सिडी (subsidy) दी जाएगी। देशी गाय के दूध में A2 प्रोटीन होने के कारण शहरी क्षेत्रों में इसकी मांग बढ़ रही है। लेकिन चूँकि देशी गायें बहुत कम दूध देती हैं, इसलिए इसके रख-रखाव पर बहुत खर्च होता है। इसके अलावा, यह देखा गया है कि देशी गाय के दूध की कीमत कम होने के कारण देशी गायों की संख्या में कमी आई है।

देशी गायों का संरक्षण कर उनकी संख्या बढ़ाने के लिए राज्य सरकार पुणे के कृषि महाविद्यालय में 'देसी गाय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र' चला रही है। इस केंद्र में मुख्य रूप से अधिक दूध देने वाली भारत की देशी गायों के संरक्षण पर काम किया जाता है। डॉ। सोमनाथ माने इस केंद्र में प्रधान वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं। महाराष्ट्र में देशी गायों की संख्या कम होने के पीछे पांच प्रमुख कारण हैं। माने कहते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में गौपालन के लिए आवश्यक श्रमिकों की कमी
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य के लिए श्रमिकों की कमी है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में गौपालन के लिए मजदूर उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए देखा जाता है कि कई किसान गाय पालना चाहते हुए भी पहल नहीं करते हैं।

देशी गाय के दूध के लिए विपणन तंत्र का अभाव
गाय के दूध के कई फायदे हैं। ग्रामीण इलाकों में इसे 'मां के दूध के बाद गाय का दूध' कहा जाता है। गाय के दूध में A2 प्रोटीन होने के कारण इसे मानव शरीर के लिए पौष्टिक माना जाता है। राज्य के कुछ शहरों में गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर और गाय का घी 2800 रुपये प्रति किलो बेचा जाता है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह तस्वीर है कि पशुपालकों को गाय के दूध की कीमत 25 से 30 रुपये से ज्यादा नहीं मिल रही है।

पशुओं के चारे की कीमत में बढ़ोतरी
डेयरी गाय को नियमित रूप से विभिन्न विटामिन और प्रोटीन युक्त चारा देने की आवश्यकता होती है। प्रोटीन और विटामिन पशु आहार में प्रोटीन और विटामिन

अगली पीढ़ी शहर की ओर जा रही है
ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर यह है कि किसानों की अगली पीढ़ी खेती के व्यवसाय में उतरने के प्रति उदासीन है।

कृषि के मशीनीकरण के कारण बैलों की आवश्यकता कम हो गयी है
वर्तमान समय में लगभग सभी कृषि गतिविधियाँ मशीनीकरण के कारण होती हैं। इसलिए कृषि कार्य में बैलों का अधिक उपयोग नहीं किया जाता है। इससे किसानों में गाय पालने की प्रवृत्ति कम हुई है।

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