वैशाली में विजय शुक्ला और वीणा देवी के बीच होगा दिलचस्प मुकाबला, किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा?

Tue, May 21, 2024, 12:15

Source : Uni India

पटना. बिहार में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections in Bihar) में हाइप्रोफाइल संसदीय सीटों में शुमार वैशाली में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की वर्तमान सांसद वीणा देवी (Veena Devi) और इंडिया गठबंधन के घटक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रत्याशी पूर्व बाहुबली विधायक विजय शुक्ला (Vijay Shukla) उर्फ मुन्ना शुक्ला के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।
इस बार के चुनाव में पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिवंगत राम विलास पासवान के पुत्र लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को राजग में सीटों में तालमेल के तहत पांच सीट जमुई(सु), वैशाली, हाजीपुर (सु) ,खगड़िया और समस्तीपुर (सु) मिली है। राम विलास पासवान के निधन के बाद लोजपा में हुयी टूट के बाद उनके भाई पशुपति कुमार पारस ने राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी ,जबकि चिराग पासवान ने लोजपा(रामविलास) बना ली थी। चिराग पासवान ने इस बार के चुनाव में हाजीपुर (सु), खगड़िया और समस्तीपुर (सु) के वर्तमान सांसदों को बेटिकट कर दिया, जबकि वैशाली एकमात्र सीट है, जहां उन्होंने वर्ष 2019 में लोजपा के टिकट पर जीती सांसद वीणा देवी को चुनावी रणभूमि में उतारा है। जमुई (सु) से सांसद रहे चिराग पासवान ने इस बार हाजीपुर (सु) से चुनाव लड़ा ,वहीं जमुई सीट पर उन्होंने अपने जीजा अरुण भारती को चुनावी अखाड़े में उतारा था।

देश का पहला गणतंत्र, जैन धर्म के संस्थापक वर्द्धमान महावीर की जन्मस्थली और गौतमबुद्ध का कर्मक्षेत्र रही वैशाली संसदीय सीट पर होने वाले चुनाव में लोजपा (रामविलास) की प्रत्याशी विधान पार्षद दिनेश सिंह की पत्नी वीणा देवी की चुनावी जंग ,राजद प्रत्याशी लालगंज से तीन बार के विधायक रहे विजय शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला से होगी। पहली बार वर्ष 2000 में मुन्ना शुक्ला ने लालगंज से निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की। फरवरी 2005 लालगंज चुनाव में लोजपा प्रत्याशी मुन्ना शुक्ला ने राजद प्रत्याशी वीणा देवी (अभी वर्तमान सांसद) को मात दी। 2005 अक्टूबर में लालगंज विधानसभा चुनाव में विजय शुक्ला जनता दल यूनाईटेड (जदयू) से चुनाव लड़े और जीत हासिल की। लोजपा रामविलास प्रत्याशी वीणा देवी के समक्ष वैशाली सीट से फिर से जीत हासिल करने की चुनौती के साथ ही चिराग पासवान के प्रति अपना भरोसा कायम रखने की भी चुनौती है। वहीं पूर्व विधायक विजय शुक्ला राजद के खेमे में आये है, इसलिये उनके लिये राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव के प्रति अपने आप को साबित करने की चुनौती है।वीणा देवी और विजय शुक्ला में दिलचस्प चुनावी जंग के आसार बन गये हैं। वैशाली संसदीय सीट पर लोजपा-रामविलास और राजद दोनों दल के प्रत्याशी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। लोजपा-रामिवलास प्रत्याशी श्रीमती वीणा देवी वैशाली क्षेत्र में पूर्व में किये गये काम को आधार बनाकर तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश में किये विकास कार्यों के नाम पर वोट मांग रही हैं। वहीं राजद प्रत्याशी विजय शुक्ला वैशाली के पूर्व सांसद रहे दिवंगत रघुवंश प्रसद सिंह के किये गये कार्यो को बताकर आम जनता से वोट मांग रहे हैं।राजद उम्मीदवार मुन्ना शुक्ला ने कहा है कि वैशाली के विकास, बेरोजगारी, महंगाई पर हम काम करेंगे। बीते एक दशक से वैशाली लोकसभा क्षेत्र का विकास रुक गया है। पूर्व सांसद रघुवंश बाबू के अधूरे सपने को हम पूरा करेंगे।वैशाली को शिखर पर पहुंचायेंगे। हम लोग सच्चे अर्थों में राजद के खेवनहार रघुवंश प्रसाद सिंह को मानने वाले लोग हैं। उन्होंने जो कार्य और पहचान को दिलाने का काम किया था, उनके बचे हुए कार्य को हम पूरा करेंगे।

लोजपा रामविलास प्रत्याशी वीणा देवी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहा है कि आज जो लोग रघुवंश प्रसाद सिंह को अपना गुरु और उनके विचार को लेकर क्षेत्र की बात कह रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि इन लोगों ने उनके खिलाफ कई बार चुनाव लड़ने का काम किया था और उनके विरोध में बोल रहे थे। सामाजिक रूप से बेहद जागरूक वैशाली की राजनीति का अपना मन और मिजाज है। यहां हमेशा सामाजिक न्याय की पृष्ठभूमि पर ही सियासी संघर्ष होता रहा है लेकिन अगड़ी जाति के उम्मीदवार ही यहां से जीतते आए हैं। हालांकि बदलते दौर के साथ जन आकांक्षाएं बढ़ी हैं और लोग विकास के मुद्दों को आगे रखकर भी वोट कर रहे हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी विकास का मुद्दा हावी रहेगा। माना जा रहा है कि इस बार वैशाली में कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।वैशाली संसदीय सीट से सर्वाधिक पांच बार जीत का परचम लहराने वाले डा. रघुवंश प्रसाद सिंह ने देश को गरीब कल्याण की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय ग्रामीण जगार गारंटी योजना (मनरेगा) की सौगात दी थी। वैशाली संसदीय सीट के पहले सांसद दिग्विजय नारायण सिंह थे,।दिग्विजय नारायण सिंह ने संयुक्त राष्ट्र में भारतीय संसदीय दल का प्रतिनिधित्व कर क्षेत्र का मान बढ़ाया था। इन दोनों शख्सियतों की राजनीति की सियासी पिच पर लंबी पारी रही है।

शिक्षा से गणितज्ञ, डॉक्टरेट के उपाधिधारी रघुवंश बाबू ने वैशाली के विकास के लिये कई काम किये।'लोकतंत्र की जननी वैशाली में आपका स्वागत है.', 'वर्धमान महावीर की जन्मस्थली वैशाली में आपका स्वागत है.' , 'गौतम बुद्ध की कर्मस्थली वैशाली में आपका स्वागत है.' बिहार के वैशाली जिले में प्रवेश करते ही आपको इस तरह के लिखे बोर्ड नजर आने लगेंगे। ये बोर्ड रघुवंश बाबू ने लगवाये थे।रघुवंश प्रसाद सिंह तीन बार केंद्रीय मंत्री रहे। बिहार जनतंत्र की जननी रही है। हमने लिंकन से डेमोक्रेसी नहीं सीखी है। पुरखों ने लोकतंत्र बनाया है। भगवान बुद्ध जब लिच्छवी पहुंचे तो कहा कि यहां रुल ऑफ लॉ है... लोक नियम बना कर रहते हैं। दिनकर ने वैशाली के बारे में कहा कि वैशाली! जन का प्रतिपालक, गण का आदि विधाता/ जिसे ढूंढता देश आज उस प्रजातंत्र की माता।/ रुको, एक क्षण पथिक! यहां मिट्टी को शीश नवाओ/ राजसिद्धियों की समाधि पर फूल चढ़ाते जाओ।

इतिहास जानना जरूरी है

जो कौमें इतिहास को याद रखती हैं वह कभी गुलाम नहीं हो सकती। मुजफ्फरपुर से अलग कर 1972 में वैशाली को एक अलग जिला बनाया गया। वैशाली संसदीय क्षेत्र वर्ष 1977 में अस्तित्व में आया। इस क्षेत्र का कुछ हिस्सा हाजीपुर संसदीय सीट में चला गया। मुजफ्फरपुर जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों और वैशाली विधानसभा को मिलाकर इस संसदीय सीट का गठन किया गया। वैशाली महिला प्रत्याशियों के लिये लकी चुनाव क्षेत्र रहा है। यहां अब तक के12 लोकसभा चुनावों में से पांच बार महिला सांसद निर्वाचित हुयी हैं। वर्ष 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी की लहर में भारतीय लोक दल (बीएलडी) के टिकट पर वैशाली के धरहरा स्टेट के जमींदार और आधुनिक बिहार के दानवीर, महापुरुष बाबू लंगट सिंह के पौत्र दिग्विजय नारायण सिंह ने कांगेस प्रत्याशी नवल किशोर सिंह को परास्त कर जीत हासिल की।इससे पूर्व श्री सिंह ने वर्ष 1952 में मुजफ्फरपुर नार्थ ईस्ट, वर्ष 1957 में पुपरी ,वर्ष 1962 और वर्ष 1967 में मुजफ्फरपुर, वर्ष 1971 में हाजीपुर से जीत हासिल की थी। वर्ष 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिंह की पत्नी किशोरी सिन्हा ने चुनाव लड़ा और कांग्रेस के ललितेश्वर प्रसाद शाही (एलपी शाही) को शिकस्त दी। इसके बाद किशोरी सिन्हा ने वर्ष 1984 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और लोकदल प्रत्याशी और पूर्व केन्द्रीय मंत्री तारकेश्वरी सिन्हा को पराजित किया। वर्ष 1989 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी सिन्हा को शिकस्त का सामना करना पड़ा। जनता दल प्रत्याशी उषा सिन्हा ने उन्हे मात दे दी।

वर्ष 1991 में जनता दल प्रत्याशी शिव शरण सिंह ने कांग्रेस की उषा सिन्हा को पराजित किया। शिवशरण सिंह के निधन के बाद 1994 में हुए उपचुनाव में पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद बिहार पीपुल्स पार्टी के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचीं। उन्होंने जनता दल उम्मीदवार किशोरी सिन्हा को पराजित किया।पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी उषा सिन्हा तीसरे नंबर पर रही। वर्ष 1996 में रघुवंश प्रसाद सिंह ने वैशाली की सियासत में इंट्री ली। जनता दल प्रत्याशी रघुवंश प्रसाद सिंह ने समता पार्टी पार्टी पूर्व सांसद वृष्ण पटेल को पराजित किया। कांग्रेस प्रत्याशी रघुनाथ पांडे तीसरे नंबर पर रहे।इसके बाद के चार चुनाव 1998, 1999, 2004 और 2009 में राजद के टिकट पर रघुवंश प्रसाद सिंह ने वैशाली में अपना सिक्का जमाया। हालांकि रघुवंश प्रसाद सिंह वैशाली से चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे।तब डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह सीतामढ़ी जिले के बेलसंड के विधायक हुआ करते थे। वर्ष 1994 के वैशाली संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में लवली आनंद से जनता दल प्रत्याशी किशोरी सिन्हा चुनाव हार गई थीं। लालू प्रसाद यादव के लिए वैशाली की सीट प्रतिष्ठा का विषय बन गयी थी। लालू अपने आवास पर अपने साथियो के साथ किसको मैदान में उतारा जाए, इस पर मंत्रणा कर रहे थे। सांसद शिवचरण बाबू के निधन के बाद कोई सवर्ण चेहरा वैशाली के लिए नहीं मिल रहा था। इसी बीच रघुवंश बाबू बैठक में पहुंचे। लोगों ने रघुवंश बाबू से वैशाली सीट से चुनाव लड़ने को कहा।रघुवंश बाबू बोले, शिवहर सीतामढ़ी छोड़ के हम कहां जाऊ ? हमरा वैशाली में के पहचानत? ... अच्छा विचार होई ।तर्क-वितर्क के बाद रघुवंश बाबू वैशाली से राजद के लोकसभा प्रत्याशी बने। 1996 से 1998, 1999, 2004 एवं 2009 में वह लगातार पांच बार जीते।
वर्ष 1998 में राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह ने समता पार्टी के वृ़ष्ण पटेल को फिर शिकस्त दी। वर्ष 1999 में राजद उम्मीदवार रघुवंश प्रसाद सिंह ने बिहार पीपुल्स पार्टी उम्मीदवार पूर्व सांसद लवली आनंद को मात दी और जीत की हैट्रिक लगायी।वर्ष 2004 में राजद उम्मीदवार रघुवश प्रसाद सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला को शिकस्त दी। जदयू के डा. हरेन्द्र कुमार सिंह तीसरे नंबर पर रहे।वर्ष 2009 में राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह ने जदयू प्रत्याशी विजय कुमार शुक्ला को फिर से मात दे दी। वर्ष 2014 के चुनाव में रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा ,राजग के साथ मिलकर लड़ी थी और उसे मोदी लहर का पूरा फायदा मिला था। वैशाली सीट से लोजपा के रामा किशोर सिंह ने इस क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद रहे राजद के कद्दावर नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को परास्त कर उनका विजयी रथ रोक दिया। जदयू के विजय कुमार सहनी तीसरे नंबर पर जबकि पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला की पत्नी निर्दलीय प्रत्याशी अनु शुक्ला चौथे नंबर पर रही। वर्ष 2019 में लोजपा प्रत्याशी वीणा देवी ने राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह को पराजित कर दिया।

वैशाली संसदीय क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर के कई संस्थानों तथा केला, आम और लीची के उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों में अशोक स्तंभ, बौद्ध स्तूप, बावन पोखर मंदिर हैं। राजा विशाल का किला और जैन धर्मावलंबियों का प्रमुख कुण्डलपुर धाम यहीं पर है। दुनिया के पहले गणतंत्र के तौर पर जाना जाने वाला वैशाली विश्व में लोकतंत्र की प्रथम प्रयोगशाला भी है। यहीं से लिच्छवी राजवंश ने गणतांत्रिक व्यवस्था की शुरुआत की थी। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से इतना समृद्ध है कि पुराण, उपनिषद, जैन और बौद्ध धर्म ग्रंथों में इसकी चर्चा है। वैशाली संसदीय सीट पर वीणा देवी और विजय शुक्ला के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है। लोजपा-रामिवलास प्रत्याशी वीणा देवी का कहना है कि वैशाली की जनता 90 वाला दशक नहीं चाहती है। महिलाओं को वैशाली ने सबसे ज्यादा प्यार दिया है। इस बार भी जनता उन्हें आगे बढ़ाएगी। यहां की जनता प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ना चाहती है। विजया शुक्ला से पहले भी दो बार चुनाव लड़ चुके हैं, हालांकि दोनों ही बार उनकी हार हुई थी। लोकसभा चुनाव 2014 में मुन्ना शुक्ला ने अपनी पत्नी अनु शुक्ला को निर्दलीय खड़ा किया था। अनु शुक्ला को भी हार का सामना करना पड़ा था। विजय शुक्ना को राजद सुप्रीमो के माय (मुस्लिम-यादव) समीकरण पर भरोसा है। उन्होंने कहा है कि वह ‘बाहुबली’ नहीं ‘जनबली’ है, जनता के बीच जाते हैं, जहां उन्हें बेहद प्यार मिलता है।

वीणा देवी गांव-गांव घूमकर वोटरों से मिल रही है और केन्द्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों से मिलकर उनके पक्ष में वोट की अपील कर रही है। वहीं विजय शुक्ला नुक्कड़ सभा कर रहे हैं और इंडिया गठबंधन के पक्ष में चुनावी माहौल होने का दावा कर रहे हैं। वीणा देवी मोदी लहर में 400 पार कर दावा कर रही है। उन्होंने कहा है कि हम किसी को चुनौती नहीं मानते हैं। विकास के लिये चुनाव हो रहा है। वहीं विजय शुक्ला का कहना है कि उनके सामने वैशाली में कोई चुनौती नहीं है। राजग 200 सीट भी नहीं ला पायेगा। लालगंज में वह वीणा देवी को पहले पराजित कर चुके हैं। वैशाली लोकसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण से किसी उम्मीदवार की जीत और हार तय होती है।वैशाली में राजपूत और यादव वोटरों का दबदबा है। इसके अलावा भूमिहार और मुस्लिम मतदाता भी यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वैशाली संसदीय सीट पर राजग हैट्रिक लगाने की तैयारी में है, वहीं राजद यहां फिर वापसी करने के लिये जोर-आजमाइश कर रही है।

वैशाली संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की छह सीटें मीनापुर, कांटी, बरुराज, पारु, साहेबगंज और वैशाली आती हैं। मीनापुर, कांटी, बरूराज और पारू मुजफ्फरपुर जिले में जबकि साहेबगंज और वैशाली , वैशाली जिले में है।बरुराज, पारु, साहेबगंज में भाजपा, मीनापुर और कांटी में राजद जबकि वैशाली में जदयू का कब्जा है।वैशाली संसदीय सीट से लोजपा(रामविलास), राजद, बहुजन समाज पार्टी, पांच निर्दलीय समेत 15 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। वैशाली लोकसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 18 लाख 65 हजार 866 है। इनमें 09 लाख 85 हजार 113 पुरुष, 08 लाख 80 हजार 684 महिला और 69 थर्ड जेंडर हैं, जो छठे चरण में 25 मई को होने वाले मतदान में इन प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। देखना दिलचस्प होगा कि देश के पहले गणतंत्र वैशाली में कौन विजयी पताका लहराने में सफल हो पाता है।

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