Vat Savitri: सनातन धर्म में व्रत सावित्री पूर्णिमा व्रत (Vrat Savitri Purnima Vrat) का खासा महत्व है. उत्तर भारत में सुहागिन महिलाएं (Married women) ज्येष्ठ अमावस्या को ये व्रत रखती है. जबकि दक्षिण भारत में महिलाएं ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पति के लंबी आयु की कामना से इस पूजा और व्रत को करती है. इस बार वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत (Vat Savitri Purnima fast) 3 जून को रखा जाएगा. इस दिन 3 शुभ संयोग भी बन रहे हैं.
काशी के विद्वान और ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि इस दिन महिलाएं पति के लम्बी आयु की कामना से व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे पूजा आराधना करती है. सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष के नीचे हल्दी, कुमकुम, श्रृंगार का समान, फल, मिष्ठान चढ़ाकर कथा सुनती है और कच्चे धागे को 7 बार वट वृक्ष में बांधकर परिक्रमा करती है. धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों देवताओं का वास होता है.
पति की आयु होती है दीर्घायु(husband's age is longevity)
ये व्रत तीन दिनों का होता है. 1 जून गुरुवार से इसकी शुरुआत होगी और 3 जून को वट वृक्ष के नीचे पूजा आराधना के बाद पूरे दिन व्रत रहकर अगले दिन इसका समापन होगा. बताते चलें कि इस व्रत के जरिए ही सती सावित्री ने अपने पति को मृत्यु के मुंह से वापस लाया था. यही वजह है कि पति के लम्बे आयु की कामना से सुहागिन महिलाएं उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक इस विशेष पर्व को मनाती है. मान्यताओं के अनुसार इस व्रत से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य के वर के साथ धन धान्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति भी होती हैं.
ये है पूजा का शुभ मुहूर्त(This is the auspicious time of worship)
पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि पंचाग के अनुसार 3 जून को सुबह 7 बजकर 7 मिनट से 8 बजकर 51 मिनट तक पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त है. इसके अलावा दोपहर में 12 बजकर 25 मिनट से सायं 5 बजकर 32 मिनट तक भी महिलाएं वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा आराधना कर सकतीं है.



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Wed, May 31 , 2023, 03:34 AM