10000 Rupee Note: ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी नोट को चलन से बाहर (out of circulation) कर दिया गया हो. 2016 में तो 500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध ही लगा दिया गया था. हालांकि, नोट को चलन से बाहर करने या फिर उस पर प्रतिबंध लगाने की कहानी 5-10 साल नहीं 75 साल से भी ज्यादा पुरानी है. तब जब 10,000 के नोट भी छापे (10000 Rupee Note) जाते थे. उस समय भी आरबीआई ने काले धन (black money) पर चोट की बात कहकर 10,000 के नोट को चलन से बाहर कर दिया था. सबसे पहले यह काम 1946 में हुआ था. यानी आजादी से एक साल पहले.
मौजूद जानकारी के अनुसार, 12 जनवरी 1946 को ब्रिटिश इंडिया के गवर्नर जनरल सर आर्चीबाल्ड (Governor General of British India, Sir Archibald) ने बड़े नोटों के विमुद्रीकरण का अध्यादेश पारित किया था. इसके अगले दिन यानी 13 जनवरी 1946 को 500, 1000 और 10,000 के नोट चलन से बाहर हो गये थे. तब 100 रुपये से ऊपर के सभी नोट को बंद कर दिया गया था. तत्कालीन सरकार का तर्क था कि कई बड़े व्यापारियों ने बड़े नोटों के रूप में काला धन जमा कर लिया था और इनकम टैक्स नहीं भर रहे थे. गौरतलब है कि भारत में अब तक 10,000 रुपये से अधिक के मूल्य वर्ग का कोई नोट नहीं छापा गया है.
1978 में फिर से नोटबंदी
1946 में बड़े नोट बंद हुए लेकिन 1954 में इन्हें फिर छापा गया. इस बार 10,000 रुपये के साथ 5,000 रुपये का भी नोट छपा. हालांकि, 1978 में मोरारदी देसाई के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए एक बार फिर नोटबंदी का ऐलान किया गया. 16 जनवरी 1978 को 1000, 5000 और 10,000 रुपये के नोट बंद कर दिये गए. इसके पीछे का कारण यह माना जाता है कि सरकार पिछली सरकारों के कुछ भ्रष्ट नेताओं को निशाने पर ले रही थी.
2016 की नोटबंदी
8 नवंबर 2016 तो इस लेख को पढ़ने वाले लगभग सभी लोगों को याद होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने की घोषणा कर दी. इसके बाद नई सीरीज के 500 के नोट जारी किए गए लेकिन 1000 के नोट वापस नहीं लौटे. उनकी जगह 2000 के नोट लाए गए.
2000 का नोट चलन से बाहर
19 मई 2023 को आरबीआई ने 2000 के नोट भी चलन से बाहर करने की घोषणा कर दी. फिलहाल देश में 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के नोट चलन में हैं. हालांकि 2,000 के नोट भी अभी बाजार में चलेंगे क्योंकि इन्हें अवैध नहीं किया गया है. गौरतलब है कि 1, 2 और 5 रुपये के नोट भी अभी मान्य हैं लेकिन इनका चलन बहुत कम है. साथ ही इनकी छपाई भी बंद हो चुकी है.
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Wed, May 24 , 2023, 12:56 PM