अश्वगंधा में होते हैं पेट के अल्सर खत्म करने वाले कंपाउंड

Source : Hamara Mahanagar Desk - Post By : alok    Thu, Dec 08, 2022, 09:03



थाइरॉयड, स्ट्रेस और एंजाइटी होती है दूर

Uses of Ashwagandha : अश्वगंधा (Ashwagandha) जिसका अर्थ है ‘घोड़े की गंध’। एक एडेप्टोजेनिक हर्ब जो आयुर्वेद में सबसे अधिक पॉपुलर है और करीब 2,500 सालों से इस्तेमाल में लाया जा रहा है। अश्वगंधा एक ऐसा हर्ब है जिसे घोड़े जैसी शक्ति दिलाने वाला भी माना जाता है। आयुर्वेद (Ayurveda) में अश्वगंधा को फिजिकल और मेंटल हेल्थ को प्रमोट करने वाला रसायन माना जाता है। अश्वगंधा को सर्दियों का भी हर्ब माना जाता है। ठंड के दिनों में इसका सेवन सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। अश्वगंधा के इस्तेमाल से खांसी का इलाज किया जाता है। इसकी जड़ों को कूट कर पानी में पकाया जाता है। इसमें गुड़ या शहद के साथ मिलाकर हल्का डोज लेने से पुरानी खांसी भी ठीक हो जाती है।

इम्यूनिटी होती है मजबूत

कई शोधों में यह बताया गया है कि अश्वगंधा से हमारी स्टैमिना भी बढ़ती है। अश्वगंधा में ऐसे कंपाउंड होते हैं जो शरीर की जरूरत के हिसाब से प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव कर सकता है। इससे रोगों से लड़ने में मदद मिलती है।

हाइपर थॉयराइड (Hyper thyroid) रोगियों को अश्वगंधा न लेने की सलाह

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि अश्वगंधा के इस्तेमाल से थॉयराइड में गड़बड़ी को ठीक किया जा सकता है। द जर्नल ऑफ अल्टरनेटिव एंड कंप्लीमेंटरी मेडिसिन में बताया गया है कि हाइपो थॉयरोडिज्म से पीड़ित लोगों को अश्वगंधा के सेवन से लाभ हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि आठ सप्ताह तक अश्वगंधा की जड़ का सेवन किया गया। इससे TSH और T4 लेवब में काफी सुधार देखने को मिला।

स्ट्रेस और अनिद्रा को करता है दूर

अश्वगंधा में एंटी-स्ट्रेस गुण होते हैं जिससे तनाव और एंजाइटी को कम किया जा सकता है। अश्वगंधा में यह एंटी-स्ट्रेस प्रभाव सिटोइंडोसाइड्स और एसाइलस्टरीग्लुकोसाइड्स दो कंपाउंड के कारण होता है। इससे अश्वगंधा सेवन करने से तनाव कम होता है। नतीजा अनिद्रा भी दूर होती है।

नींद न आने की समस्या से जूझ रहे लोग अश्वगंधा का सेवन कर सकते हैं। अश्वगंंधा की जड़ ही नहीं, पत्तियां भी गुणकारी होती हैं। इसके पत्तों में ट्राएथिलीन ग्लाइकोल नामक कंपाउंड होता है जिससे गहरी नींद आती है।

अश्वगंधा में है एंटी कैंसर गुण

अश्वगंधा को बोटेनिकल नाम विथानिया सोमनिफेरा है जिसमें एंटी कैंसर गुण हैं। शोध के अनुसार, इसमें रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पेशीज बनाने की क्षमता होती है जो कैंसर की कोशिकाओं को मार देती है। शोधकर्ताओं ने अपने ट्रायल में पाया है कि अश्वगंधा में लंग, ब्रेस्ट, कोलोन और ब्रेन कैंसर से लड़ने की ताकत होती है।

अश्वगंधा कितना खाएं?

आयुर्वेद में किसी हर्ब के तीन तरह के डोज होते हैं हाई, मीडियम और लो। यदि कोई वयस्क डिप्रेशन से जूझ रहा है, अनिद्रा से पीड़ित है या कोई दूसरी गंभीर बीमारी है तो उसे 15 से 30g तक अश्वगंधा की जड़ का पाउडर दिया जा सकता है। इसे दूध, घी या गुड़ के साथ लिया जा सकता है। हालांकि अश्वगंधा लेने से पहले किसी आयुर्वेदाचार्य से जरूर कंसल्ट करें। अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए अश्वगंधा के डोज अलग-अलग हो सकते हैं।

अश्वगंधा में हैं कई तरह के कंपाउंड

अश्वगंधा में कई ऐसे कंपाउंड हैं जो इसे खास बनाते हैं जैसे फ्लावोनॉयड्स। यही नहीं, अश्वगंधा को मदर ऑफ ऑल एंटीऑक्सीडेंट्स कहा जाता है। इसमें केटालेस, सुपरऑक्साइड डिस्म्यूटेज और ग्लूटाथायोन होता है। इसमें एल्कालॉयड्स, एमीनो एसडि्स, न्यूरोट्रांसमीटर्स, स्टेरॉल्स, टैनिन, लिगनैंस और ट्रिटरपेंस होते हैं। इन कंपाउंड की वजह से ही मेडिसिन के रूप में अश्वगंधा की मांग है।


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