हैदराबाद। देश के औषधि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ' भारत की फार्मा राजधानी' (India Pharma Capital) के रूप में विख्यात हैदराबाद में शनिवार को आयाेजित एक चिंतन शिविर में केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने औषधि निर्यात क्षेत्र को सरकार की ओर से पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के दुनिया के एक प्रमुख जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में विख्यात हैदराबाद में इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्र सरकार के वाणिज्य विभाग द्वारा फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (Pharmexcil) के सहयोग से किया गया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल (Rajesh Agarwal) ने की और कार्यक्रम में फार्माएक्सिल के पदाधिकारियों और आमंत्रित सदस्यों के अलावा वाणिज्य और औषधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। वाणिज्य सचिव ने गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाइयों के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की रणनीतिक पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि स्वास्थ्य सेवा (healthcare) में गुणवत्ता ही निर्णायक कारक बनी रहेगी। सचिव ने मूल्य, गुणवत्ता और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए उद्योग के साथ मिलकर काम करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया और सत्र के दौरान निर्यातकों के साथ बातचीत करते हुए उनकी शंकाओं और चिंताओं का समाधान किया।
चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के 79वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में स्वास्थ्य सेवा में नवाचार और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर दिये गये बल का उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा था: "शोधकर्ताओं और उद्यमियों को नई दवाओं और चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के लिए पेटेंट प्राप्त करना चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत न केवल अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करे, बल्कि चिकित्सा आत्मनिर्भरता और नवाचार का वैश्विक केंद्र भी बने, जिससे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और मानव कल्याण में देश की नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित हो।"
वाणिज्य सचिव श्री अग्रवाल ने भारत के औषधि उद्योग की मजबूत विकास गति पर प्रकाश डाला और कहा कि विश्व की लगभग 18-19 प्रतिशत आबादी वाला भारत स्वयं एक विशाल और विस्तारित बाजार है, जहां बढ़ती आय स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को और बढ़ाएगी। वर्तमान में लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के मूल्य वाले इस उद्योग में निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत योगदान है और यह अपने विशाल आकार, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और जेनेरिक दवाओं में वैश्विक नेतृत्व के कारण "विश्व की फार्मेसी" (Pharmacy of the World) के रूप में उभरा है।
तेजी से अनिश्चित और भू-राजनीतिक रूप से अस्थिर वैश्विक वातावरण में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने स्वदेशी उत्पादन के माध्यम से घरेलू औषधि आवश्यकताओं की 80-90 प्रतिशत से अधिक की पूर्ति करके अधिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने और एपीआई, बल्क ड्रग्स और मध्यवर्ती दवाओं में महत्वपूर्ण आयात निर्भरता को कम करने के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने निर्यात आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, यह देखते हुए कि भारत लगभग 200 देशों को निर्यात करता है, फिर भी मजबूत बाजार उपस्थिति के माध्यम से विस्तार और लचीलापन बनाने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने वैश्विक विश्वास बढ़ाने के लिए एक मजबूत गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का आह्वान किया, साथ ही बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स जैसे उभरते उद्योग रुझानों के साथ तालमेल बिठाने की बात कही। मात्रा-आधारित उद्योग से मूल्य-आधारित उद्योग में परिवर्तन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने नवाचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें जेनेरिक दवाओं में निरंतर मजबूती के साथ-साथ नए पेटेंट के विकास में भागीदारी भी शामिल है।
उन्होंने भू-राजनीतिक रूप से खंडित दुनिया में आयात आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने के महत्व पर भी बल दिया, जहां उपलब्धता महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्पष्ट और सहयोगात्मक विचार-विमर्श से क्षेत्र के भीतर से ही व्यावहारिक समाधान निकल सकते हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित बायोफार्मा शक्ति की घोषणा के अनुरूप है, जो कि 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली एक समर्पित राष्ट्रीय पहल है। इसका उद्देश्य भारत के बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और देश को वैश्विक बायोफार्मा केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
मात्रा के हिसाब से भारत वैश्विक स्तर पर दवाओं का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और मूल्य के हिसाब से 14वां सबसे बड़ा उत्पादक है। इस क्षेत्र का निर्यात 2024-25 में 30.47 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। अप्रैल-फरवरी 2025-26 के दौरान, दवा निर्यात 28.29 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 5 प्रतिशत से अधिक है। इस क्षेत्र ने 2024-25 में 21.5 अरब डॉलर के बराबर शुद्ध विदेशी मुद्रा अधिशेष दर्ज किया था।



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